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Ujjain News: ज्योतिषाचार्य से जानें आखिर 15 जनवरी को क्यों मनेगा मकर संक्रांति का पर्व? इस वर्ष क्या रहेगा खास

Wed, 14 Jan 2026 08:57 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी, गुरुवार को श्रद्धा और परंपरा के अनुसार मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 07 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि सूर्य का राशि परिवर्तन मध्याह्न के बाद हो रहा है, इसलिए धर्मशास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति का पर्वकाल अगले दिन अर्थात 15 जनवरी को माना जाएगा। ज्योतिषाचार्य पंडित अमर त्रिवेदी ‘डब्बावाला’ ने बताया कि विष्णु पुराण और भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि सूर्य का राशि परिवर्तन मध्यान्ह या अपराह्न काल में होता है, तो उस संक्रांति का पुण्यकाल अगले दिन होता है। इसी शास्त्रीय मान्यता के आधार पर इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा और इसी दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व रहेगा। भारतीय ज्योतिष में सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति के साथ ही सूर्य दक्षिणायन को त्यागकर उत्तरायण होते हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है। इसी दिन से उत्तरायण काल का शुभारंभ होता है, जो आगामी छह माह तक रहता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति पर सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही अश्विनी और अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव भी रहेगा। विशेष बात यह है कि सूर्य के साथ-साथ मंगल, बुध और शुक्र का भी कुछ ही दिनों में राशि परिवर्तन होने वाला है, जिससे यह संक्रांति और अधिक फलदायी मानी जा रही है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान, तिल का दान, तिल स्नान और तिल के लड्डुओं का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चावल को देव अन्न माना गया है, जबकि मूंग इस ऋतु की पहली फसल होती है। तिल का दान उन्नति, समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।

ये भी पढ़ें- MP Weather Today: प्रदेश ठंड का असर जारी, ग्वालियर-चंबल सबसे ज्यादा ठंड,15 जनवरी से बदलेगा मौसम का मिजाज ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैया या पितृ दोष का प्रभाव है, वे तांबे के कलश में काले तिल भरकर, उस पर स्वर्ण रखकर किसी वैदिक ब्राह्मण को दान कर सकते हैं। इससे कार्यों में प्रगति और पारिवारिक जीवन में सुधार होता है। महिलाओं के लिए भी मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। महिलाएं वस्त्र, सुहाग सामग्री और अन्न का दान कर सकती हैं। इसके अलावा जरूरतमंदों और गरीब परिवारों को भोजन कराना भी श्रेष्ठ पुण्य माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को भी दान का महत्वपूर्ण रूप माना गया है। जरूरतमंद विद्यार्थियों की पढ़ाई, फीस और पुस्तकों में सहायता करना भी मकर संक्रांति के दिन विशेष पुण्य प्रदान करता है।

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