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Ujjain Mahakal: भस्म आरती में भगवान महाकाल को करवाया तिल और तेल से स्नान, फिर मनाई मकर संक्रांति

Thu, 15 Jan 2026 07:58 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

महाकाल मंदिर में मकर संक्रांति पर्व आज 15 जनवरी को धूमधाम से मनाया गया। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी दोपहर 3:05 बजे से हुआ लेकिन पर्व काल आज से था, इसीलिए यह पूजन आज किया गया। उज्जैन में किसी भी पर्व की शुरुआत बाबा महाकाल के दर से होती है। इसी परंपरा के चलते मकर संक्रांति पर्व पर भी सबसे पहले बाबा महाकाल को तिल के तेल से स्नान कर तिल्ली के लड्डू और पकवानों का भोग लगाकर की गई।

ज्योतिषों के अनुसार 14 जनवरी दोपहर 3:05 पर सूर्य धनु राशि छोड़कर के मकर राशि में प्रवेश किया, जिससे मकर संक्रांति हो गई, लेकिन इसका प्रभाव आज 15 को रहेगा, क्योंकि सूर्य की संक्रांति यदि दोपहर या अपरान्ह में होती है तो उसका पर्व काल अगले दिन माना जाता है। यही वजह है कि महाकाल में मकर संक्रांति पर्व आज 15 जनवरी को मनाया गया।
महाकाल मंदिर के पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि मकर संक्रांति स्नान पर्व के रूप में मनाया जाता है। आज संक्रांति पर्व पर तड़के 4 बजे भस्मारती के बाबा महाकाल को तिल के उबटन से स्नान कराया गया।

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शक्कर से बने तिल के लड्डु ओर तिल्ली के पकवानों का महाभोग लगाकर जलाधारी में भी तिल्ली और पतंग अर्पित की गई। इस वर्ष सूर्य के उत्तरायन का पर्व मकर संक्रांति सर्वार्थसिद्धि व अमृतसिद्धि योग के महासंयोग में मनाया जा रहा है। संक्रांति पर सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर होता है। संक्रांति के पर्व काल पर सामान्यतः चावल, हरी मूंग की दाल की खिचड़ी, पात्र, वस्त्र, भोजन आदि वस्तुओं का दान अलग-अलग ढंग से करने की परंपरा भी है। संक्रांति पर श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान फिर दान पुण्य कर बाबा महाकाल के दर्शन करते है।

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