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Mahakal Bhasma Aarti: गंगा दशहरे पर अद्भुत रूप में दिखे श्री महाकाल, शीष पर विराजमान मां भागीरथी का हुआ पूजन

Tue, 26 May 2026 07:48 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

 ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की दशमी पर मंगलवार सुबह विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दरबार में हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्त देर रात से ही कतारों में लगकर अपने आराध्य देव बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार किया गया और भस्म आरती संपन्न हुई। मंदिर परिसर पूरे समय “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गुंजायमान रहा। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की दशमी पर प्रातः 4 बजे भस्म आरती की गई। वीरभद्र भगवान से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के पट खोले गए और पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटा बजाकर “हरि ओम” मंत्रोच्चार के साथ जल अर्पित किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार कर कपूर आरती की तथा उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि गंगा दशहरा के अवसर पर सबसे पहले बाबा महाकाल के शीश पर विराजमान मां गंगा का पूजन किया गया, इसके बाद भस्म आरती की गई। भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। ये भी पढ़ें- Twisha Sharma Case: एसजी बोले- ऐसी घटना से अच्छा, हो जाए तलाक; सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी- निष्पक्ष जांच जरूरी

यह है आरती का समय
- भस्म आरती सुबह 4 से 6 बजे तक
- दद्योदक आरती प्रात: 7 से 7:45 बजे तक
- भोग आरती प्रात: 10 से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन सायं 5 से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती सायं 7:00 से 7:45 बजे
- शयन आरती रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक
महाकालेश्वर मंदिर मे आरतियों के समय में हुआ यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक जारी रहेगा।  

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