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Ujjain: भस्म आरती के दौरान महाकाल ने दिए त्रिनेत्र स्वरूप में दर्शन, मंदिर परिसर में गूंजे जयकारे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Updated Thu, 07 Aug 2025 08:03 AM IST

श्रावण मास की त्रयोदशी तिथि पर गुरुवार तड़के उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हजारों श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में एकत्रित हो गए और ब्रह्म मुहूर्त में भगवान महाकाल के दर्शन किए। मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर भस्म आरती का आयोजन गुरुवार तड़के 3 बजे हुआ। परंपरा के अनुसार वीरभद्र जी से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की विधिवत पूजा की गई।

पंचामृत से हुआ जलाभिषेक, विशेष श्रृंगार बना आकर्षण का केंद्र
भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर 'हरि ओम' जल अर्पित किया गया। पूजन के बाद बाबा महाकाल का भांग से विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद कपूर आरती के साथ भगवान को नवीन मुकुट और गुलाब की माला पहनाई गई।

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महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म, त्रिनेत्र स्वरूप में हुए प्रकट
परंपरा अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। इस दौरान बाबा महाकाल ने त्रिनेत्र स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंज उठा।

भस्म आरती में उमड़ी भीड़, भक्तों ने लिया आशीर्वाद
भक्तों की भारी भीड़ ने भस्म आरती में भाग लिया और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर स्वयं को कृतार्थ माना। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में प्रकट होते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं।  

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