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Ujjain: त्रिपुंड और चंद्रमा से हुआ महाकाल का दिव्य श्रृंगार, सुबह चार बजे खुला पट; हजारों भक्तों ने किए दर्शन

Tue, 10 Mar 2026 07:36 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर मंगलवार सुबह बाबा महाकाल के दरबार में भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्त देर रात से ही कतारों में लगकर अपने इष्ट देव के दर्शन के लिए इंतजार करते रहे। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही बाबा महाकाल का त्रिनेत्र और त्रिपुंड से अलौकिक श्रृंगार कर भस्म अर्पित की गई। इस दिव्य आरती के दर्शन के साथ ही पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के 4 बजे भस्म आरती संपन्न हुई। परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक जल, दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरि-ओम का जल अर्पित किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने भगवान महाकाल का भव्य श्रृंगार कर कपूर आरती की और उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया।

पढ़ें; मार्च की शुरुआत में ही झुलसाने लगी गर्मी, पारा 39 डिग्री,सामान्य से 4.6 डिग्री ज्यादा तापमान  इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के बीच भस्म आरती संपन्न हुई। आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल का चंद्रमा, त्रिनेत्र और त्रिपुंड से अलौकिक श्रृंगार किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर जय श्री महाकाल का जयघोष किया। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। महाकाल मंदिर में आरतियों का समय भस्म आरती : सुबह 4:00 से 6:00 बजे दद्यौदक आरती : सुबह 7:00 से 7:45 बजे भोग आरती : सुबह 10:00 से 10:45 बजे संध्या पूजन : शाम 5:00 से 5:45 बजे संध्या आरती : शाम 7:00 से 7:45 बजे शयन आरती : रात 10:30 से 11:00 बजे महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों के समय में किया गया यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक लागू रहेगा।

हाथी पर निकले बाबा महाकाल, 51 ध्वजों के साथ निकली शाही गेर
अवंतिका नगरी में आस्था, परंपरा और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब भगवान महाकालेश्वर की पारंपरिक ध्वज गेर (वीरभद्र चल समारोह) रविवार शाम भव्य रूप से निकाली गई। केसरिया ध्वजों, ढोल-नगाड़ों की गूंज और बाबा महाकाल के जयकारों से पूरी धर्मनगरी भक्तिमय हो उठी। महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई इस अलौकिक यात्रा में 51 ध्वज पताकाएं श्रद्धा का प्रतीक बनकर आगे बढ़ रही थीं। हाथी पर विराजमान बाबा महाकाल के स्वरूप ने भक्तों को दर्शन दिए, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। रथ पर स्थापित विशेष चांदी के ध्वज के दर्शन के लिए भी भक्तों की भारी भीड़ रही। गेर में भगवान श्रीकृष्ण-राधा, इंद्र युद्ध, गजानन गणपति और शिव-पार्वती की जीवंत झांकियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महाकाल मंदिर से शुरू होकर यह गेर कोट मोहल्ला, तोपखाना, दौलतगंज, कंठाल, सतीगेट, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और गुदरी चौराहा होते हुए पुनः मंदिर पहुंची। रास्ते भर जगह-जगह मंचों से पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया।

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