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Ujjain News: जटाधारी के स्वरूप में नजर आए बाबा श्री महाकाल, खुला तीसरा नेत्र; मखाने की माला पहनकर दिए दर्शन

Sat, 30 May 2026 07:37 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर शनिवार सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दरबार में हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्त देर रात से ही कतारों में लगकर अपने आराध्य देव बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। प्रातः 4 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही भगवान महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। अलौकिक श्रृंगार और भस्म अर्पण के बाद श्रद्धालुओं ने दिव्य दर्शन किए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर शनिवार सुबह 4 बजे भस्म आरती संपन्न हुई। वीरभद्र जी से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के पट खोले गए। इसके पश्चात पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटा बजाकर हरि-ओम का जल अर्पित किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया तथा कपूर आरती के बाद उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया। इसके उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। फिर झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न हुई। आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि चतुर्दशी के अवसर पर बाबा महाकाल का जटाधारी स्वरूप में श्रृंगार किया गया। साथ ही उनका तीसरा नेत्र भी सजाया गया। भगवान महाकाल को मखाने की माला अर्पित की गई। बाबा के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। ये भी पढ़ें- हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: इंदौर का ‘मालवा अखबार’ भी रच चुका इतिहास, उदन्त-मार्त्तण्ड के 22 साल बाद छपा था यह है आरती का समय
- भस्म आरती सुबह 4 से 6 बजे तक
- दद्योदक आरती प्रात: 7 से 7:45 बजे तक
- भोग आरती प्रात: 10 से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन सायं 5 से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती सायं 7:00 से 7:45 बजे
- शयन आरती रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक
महाकालेश्वर मंदिर मे आरतियों के समय में हुआ यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक जारी रहेगा।    

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