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Ujjain: भस्म आरती में भांग और मोगरे के विशेष श्रृंगार में सजे बाबा महाकाल, जयघोषों के बीच भक्तों को दिए दिव्य

Tue, 12 May 2026 07:33 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की दशमी पर मंगलवार सुबह बाबा महाकाल की भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भक्त देर रात से ही कतारों में लगकर अपने आराध्य बाबा महाकाल के दर्शन के लिए इंतजार करते नजर आए। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार किया गया और विधि-विधान से भस्म आरती संपन्न हुई। पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा। जलाभिषेक और पंचामृत से हुआ पूजन श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती से पहले वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर “हरि ओम” का जल अर्पित किया गया। भांग और बेलपत्र से हुआ विशेष श्रृंगार पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया। कपूर आरती के बाद भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती संपन्न हुई। आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल का भांग से श्रृंगार किया गया। उनके मस्तक पर चंद्रमा और बेलपत्र सजाए गए। साथ ही मखाने और मोगरे की माला भी अर्पित की गई। हजारों भक्तों ने किए दिव्य दर्शन बाबा महाकाल के दिव्य और अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भक्तों ने जय श्री महाकाल के जयघोष के साथ भस्म आरती का लाभ लिया। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। महाकाल मंदिर की आरतियों का समय भस्म आरती — सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक दद्योदक आरती — सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक भोग आरती — सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक संध्या पूजन — शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक संध्या आरती — शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक शयन आरती — रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक मंदिर प्रशासन के अनुसार आरतियों के समय में किया गया यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक लागू रहेगा। आज दोपहर से शुरू होगी अपरा एकादशी आज 12 मई 2026 को अपरा एकादशी भी मनाई जा रही है। यह एकादशी ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे बेहद पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत रखने से सुख, समृद्धि और संपन्नता की प्राप्ति होती है। अपरा एकादशी आज दोपहर से शुरू होकर 13 मई 2026 तक रहेगी।  

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