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Sehore News: दुर्दशा के दौर में गौ-भक्ति की अनूठी मिसाल, किसान ने गाय को दिया परिवार जैसा अंतिम सम्मान

Mon, 02 Feb 2026 02:33 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सीहोर जिले के ग्राम लांचौर में रहने वाले किसान श्यामलाल मीणा ने गौ-भक्ति और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। जिस दौर में दूध देना बंद करते ही गायों को सड़कों पर छोड़ देना आम बात हो गई है, उसी दौर में श्यामलाल मीणा ने अपनी 20 वर्ष पुरानी गाय राधा को परिवार के मुखिया जैसा सम्मान दिया। राधा केवल एक पशु नहीं थी, बल्कि उनके जीवन-संघर्ष की साक्षी और परिवार की सबसे बुजुर्ग सदस्य थी। उसके निधन के बाद श्यामलाल और उनके परिवार ने यह साबित कर दिया कि सच्ची सेवा और भावनात्मक जुड़ाव आज भी जिंदा है।

श्यामलाल मीणा बताते हैं कि करीब 20 साल पहले, जब उनके पास रहने के लिए पक्की छत तक नहीं थी, तब वे एक अत्यंत कमजोर और उपेक्षित गाय को घर लाए थे। परिवार ने सीमित साधनों में भी उसका पालन-पोषण किया। तिनका-तिनका जोड़कर गाय की सेवा की गई। समय के साथ वही गाय, राधा, उनके घर की लक्ष्मी बन गई। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी, झोपड़ी की जगह पक्का मकान बना और जीवन में स्थिरता आई। श्यामलाल मानते हैं कि यह सब राधा के आशीर्वाद और सेवा का प्रतिफल था।

घर की बुजुर्ग, जिनके बिना कदम नहीं बढ़ते थे
परिवार के लिए राधा का स्थान किसी माँ या दादी से कम नहीं था। श्यामलाल मीणा बताते हैं कि वे कभी भी घर से बाहर निकलते समय राधा के पैर छुए बिना नहीं जाते थे। आज परिवार में पांच अन्य गायें हैं, लेकिन राधा का स्थान सबसे ऊपर था। वह परिवार की सबसे बुजुर्ग थी, जिसने हर उतार-चढ़ाव में साथ निभाया। उसके निधन से ऐसा लगा मानो घर का एक मजबूत स्तंभ टूट गया हो। पूरे परिवार ने इसे व्यक्तिगत क्षति के रूप में महसूस किया।

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बैलगाड़ी पर निकली अंतिम यात्रा
शनिवार रात जब राधा ने अंतिम सांस ली, तो मीणा परिवार के घर चूल्हे नहीं जले। रविवार को उसकी अंतिम यात्रा पूरे सम्मान और उत्सव जैसे माहौल में निकाली गई। फूलों से सजी बैलगाड़ी पर गौमाता के पार्थिव शरीर को लेटाया गया। आगे-आगे ढोल-ताशे बज रहे थे, पटाखे फोड़े जा रहे थे। गांव की गलियों से गुजरते समय ग्रामीणों ने जगह-जगह रुककर गौमाता को नमन किया। दृश्य ऐसा था मानो किसी बड़े बुजुर्ग की अंतिम यात्रा हो।

वैदिक विधि से हुआ अंतिम संस्कार
गांव के बाहर पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ राधा को भू-समाधि दी गई। पंडितों द्वारा मंत्र पढ़े गए और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। गौमाता की अंतिम संस्कार यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग श्यामलाल मीणा की संवेदनशीलता और आस्था की खुले दिल से सराहना कर रहे हैं। यह दृश्य लोगों के दिलों को छू गया।

समाज के लिए आईना
आज जब गौमाता सड़कों पर दुर्दशा का शिकार हो रही हैं, तब श्यामलाल मीणा का यह कार्य समाज के लिए आईना है। उन्होंने संदेश दिया कि किसान और गौवंश का रिश्ता केवल दूध या व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, संस्कारों और कृतज्ञता का रिश्ता है। यदि हर किसान गौमाता को परिवार का सदस्य माने, तो न कोई गाय बेसहारा होगी और न ही सड़कों पर तड़पेगी। श्यामलाल की सोच समाज की सोई हुई चेतना को जगाने वाली है।

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