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Pandit Mishra Controvarsy: कायस्थ समाज ने प्रदीप मिश्रा मुर्दाबाद के लगाए नारे, कहा-वृंदावन जाकर माफी मांगें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Updated Wed, 18 Jun 2025 10:59 PM IST

विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का चित्रगुप्त को लेकर दिए विवादित बयान को लेकर जमकर विरोध हो रहा है। सीहोर में कायस्थ समाज के लोग बुधवार को ‘पंडित प्रदीप मिश्रा मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए पहुंचे। इस दौरान विरोध जताते हुए मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को देते हुए उनसे वृंदावन जाकर नाक रगड़कर माफी मांगने की मांग की है। कायस्थ समाज का कहना है कि अगर वह चित्रगुप्त शक्तिपीठ जाकर माफ़ी नहीं मांगेंगे तो इसे लेकर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

कायस्थ समाज बुधवार को सीहोर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचा और पंडित प्रदीप मिश्रा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चित्रगुप्त भगवान को लेकर जो अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है, उससे कायस्थ समाज में आक्रोश है। कायस्थ समाज के अध्यक्ष प्रदीप सक्सेना ने कहा कि पंडित प्रदीप मिश्रा जब तक सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तब तक समाज उनका पुरजोर विरोध करेगा। कायस्थ समाज के वरिष्ठ एडवोकेट शैलेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि पंडित प्रदीप मिश्रा बार-बार अनाप-शनाप बयान देकर अपना ग्राफ कम कर रहे हैं। राधा रानी पर जिस तरह उन्होंने टिप्पणी की, वैसे ही अभद्र भाषा का प्रयोग अब चित्रगुप्त को लेकर किया। पंडित मिश्रा ने मंगलवार को मीडिया के समक्ष माफी नहीं मांगने की बात कही जा रही है। जबकि उनकी माफी में उन्होंने ये बताने का प्रयास किया कि मैं जो बोलता हूं वह वेद पुराण से बोलता हूं। वेद पुराण की बातें कई लोगों ने पढ़ीं होंगी जो समझ नहीं आती है। मैंने जो कहा है वेद पुराणों में लिखा हुआ है। इससे कायस्थ समाज में रोष बढ़ गया है। इनका अंत समय निकट आ रहा है और इन्हें थोड़ी भी बुद्धि है तो ये हमारा वृंदावन में शक्ति पीठ है वहां पर जाकर नाक रगड़े। 

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पूरे संत समाज मेें हो रही बैठक
समाज के लोगों ने बताया कि पूरे वृंदावन में भी संत समाज की बैठक हो रही है और इनके खिलाफ विश्व व्यापी, राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाएगा। पंडित प्रदीप मिश्रा चित्रगुप्त शक्तिपीठ वृंदावन पहुंचकर नाक रगड़कर माफी मांगें या सार्वजनिक माफी मांगें। जब तक वह सार्वजनिक माफी नहीं मांगेंगे, कायस्थ समाज उनकी हर कथा का हर जगह विरोध करेगा। 

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ये था मामला
कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने महाराष्ट्र में चल रही कथा के दौरान 14 जून को धर्मराज यमराज और भगवान श्री चित्रगुप्त जी का परिहास करते हुए उन्हें ‘मुच्छड़’ कह कर संबोधित किया और चित्रगुप्त जी से कहा ‘अरे ऐ चित्रगुप्त! तू सबका हिसाब रखना पर मेरा मत रखना’। यह कथन न केवल असंवेदनशील था बल्कि सनातन धर्म के आराध्य देवों का अपमान भी था।

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