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सीहोर में पानी के लिए हाहाकार: 50 गांव बूंद-बूंद को तरसे, महिलाएं गड्ढों से भर रहीं गंदा पानी; कुएं भी सूखे

Mon, 18 May 2026 07:21 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सीहोर जिले में गर्मी अपने चरम पर है और इसके साथ ही जल संकट ने भयावह रूप ले लिया है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि जिले के करीब 50 गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सीहोर और इछावर क्षेत्र अब ड्राई कैटेगरी में शामिल हो चुके हैं। गांवों में नलजल योजनाएं जवाब दे चुकी हैं और हैंडपंप सूखने लगे हैं। खेतों के कुएं, ट्यूबवेल और अस्थायी जल स्रोत ही अब ग्रामीणों की अंतिम उम्मीद बने हुए हैं।

एक बाल्टी पानी के लिए दिनभर जंग
ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या अब रोजमर्रा की परेशानी नहीं, बल्कि जीवन-मरण का संकट बन गई है। महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक पानी की तलाश में भटक रहे हैं। कई गांवों में लोग एक से दो किलोमीटर दूर जाकर गहरे कुओं में उतरने को मजबूर हैं। कपड़े से छानकर मटमैला पानी घर लाना अब उनकी मजबूरी बन चुका है। तपती दोपहरी में पानी की तलाश में भटकते इन चेहरों पर बेबसी साफ दिखाई देती है।

रामगढ़ पंचायत में दर्दनाक तस्वीरें
इछावर क्षेत्र की ग्राम पंचायत रामगढ़ के अंतर्गत आने वाले पांगरी जंगल, कातापाठा और सहबड़ला आदिवासी मोहल्लों में हालात बेहद गंभीर हैं। यहां जल संकट ने ग्रामीणों की जिंदगी को कठिन बना दिया है। सरपंच प्रतिनिधि अशोक मीणा का कहना है कि कई बार जिला प्रशासन को आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक नलकूप खनन की मांग पूरी नहीं हुई। उनका कहना है कि गांव की महिलाएं गड्ढे खोदकर रिसते हुए पानी को इकट्ठा कर रही हैं। कई जगह गहरे कुओं में उतरकर जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।

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‘गंदा पानी पी रहे, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं’
पांगरी गांव की कृपा बाई बताती हैं कि गांव के कुएं में गंदा और बदबूदार पानी है, जिसे छान-छानकर पीना पड़ रहा है। रामगढ़ की रेशम बाई, गौरी बाई, कोसा बाई और गायत्री बाई का कहना है कि जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि पानी निकालना जानलेवा जोखिम बन गया है। उनकी आंखों में प्रशासन से सिर्फ एक ही सवाल है कि आखिर कब बुझेगी उनकी प्यास?

जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज
क्षेत्र के किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पीएचई मंत्री और जिले की प्रभारी मंत्री से प्रभावित गांवों में नए नलकूप खनन की मांग की है। उनका कहना है कि कई गांवों में हालात विस्फोटक हो चुके हैं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ सकता है। सीहोर तहसील के अमरोद, आलमपुरा और कुलांस क्षेत्र में भी जल संकट की गंभीर स्थिति बनी हुई है।

कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश
बढ़ते संकट को देखते हुए कलेक्टर बालागुरू के. ने सभी सीएमओ, जनपद सीईओ और पीएचई अधिकारियों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने खराब हैंडपंपों और नलजल योजनाओं की तत्काल मरम्मत, नियमित मॉनिटरिंग और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।

पीएचई का दावा-250 शिकायतों का निराकरण
पीएचई के कार्यपालन यंत्री प्रदीप सक्सेना ने माना कि भीषण गर्मी के चलते सीहोर और इछावर ड्राई कैटेगरी में पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि जिलेभर में अब तक 250 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। हैंडपंप सुधार, सिंगल फेस मोटर लगवाने और पाइपलाइन विस्तार जैसे कार्य किए जा रहे हैं।

लेकिन सवाल अब भी बाकी है...
सरकारी दावों के बीच गांवों की सच्चाई अब भी प्यास से तड़प रही है। मटमैला पानी पीते बच्चे, सिर पर मटके ढोती महिलाएं और सूखे कुओं के किनारे खड़े बुजुर्ग प्रशासन से राहत की आस लगाए बैठे हैं। सवाल यही है कि क्या राहत समय पर पहुंचेगी या प्यास यूं ही ग्रामीणों की जिंदगी पर कहर बनकर टूटती रहेगी?  

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