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Satna: आवारा कुत्तों का बढ़ा खौफ,10 दिनों में 1104 एंटी-रेबीज इंजेक्शन की खपत,क्या नहीं हो रहे बचाव के इंतजाम?

Wed, 14 Jan 2026 08:13 AM IST
सतना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना

सतना शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या आमजन के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। स्थिति यह है कि सुबह की सैर हो या बच्चों का स्कूल जाना, हर समय लोगों के मन में भय बना रहता है। जिला अस्पताल के ताजा आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को स्पष्ट रूप से उजागर कर रहे हैं। जनवरी के शुरुआती 10 दिन, डरावने आंकड़े
साल 2026 के शुरुआती दस दिनों में ही सतना जिला अस्पताल में कुल 1104 एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं। यह आंकड़ा केवल इंजेक्शनों की संख्या नहीं, बल्कि जिले में लगातार बढ़ रही डॉग बाइट की घटनाओं का सीधा संकेत है। इन 1104 डोज में पहले, दूसरे और तीसरे चरण के इंजेक्शन शामिल हैं, जिससे इलाज के बढ़ते दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। हर दिन बढ़ रही डॉग बाइट की घटनाएं
बीते दस दिनों में 370 नए मरीज ऐसे सामने आए हैं, जिन्हें पहली बार एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 37 लोग आवारा कुत्तों का शिकार बन रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुमान के अनुसार, यदि निजी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के आंकड़े भी जोड़ दिए जाएं, तो यह संख्या 150 से अधिक प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। जिला अस्पताल में रोज 110 से अधिक मरीज
डॉग बाइट के बढ़ते मामलों का सीधा असर जिला अस्पताल की ओपीडी पर दिखाई दे रहा है। प्रतिदिन 110 से अधिक लोग केवल एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इंजेक्शन कक्ष के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की है। वर्तमान में जिला अस्पताल में 23,500 डोज और सीएमएचओ कार्यालय में 2,500 डोज उपलब्ध हैं। इस तरह कुल 26 हजार एंटी-रेबीज वैक्सीन का स्टॉक मौजूद है। सरकारी अस्पतालों में यह इलाज पूरी तरह निःशुल्क दिया जा रहा है। औसतन जिले में हर साल करीब 30 हजार डोज की आवश्यकता पड़ती है।

ये भी पढ़ें- MP Weather Today: प्रदेश ठंड का असर जारी, ग्वालियर-चंबल सबसे ज्यादा ठंड,15 जनवरी से बदलेगा मौसम का मिजाज भीड़ को नियंत्रित करने और मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से जिला अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन के लिए अलग काउंटर बनाया गया है। मरीज पहले चिकित्सक से परामर्श लेते हैं और उसके बाद उन्हें तुरंत वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि स्टॉक समाप्त होने से पहले नई मांग भेजी जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डॉग बाइट को हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है। कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से धोना चाहिए। झाड़-फूंक या घरेलू उपचार से बचें और 24 घंटे के भीतर अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन जरूर लगवाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद इलाज संभव नहीं होता, इसलिए समय पर वैक्सीन ही एकमात्र बचाव है। डॉग बाइट की लगातार बढ़ती घटनाओं को लेकर शहरवासियों में रोष है। लोगों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि जब तक नसबंदी अभियान और नियमित निगरानी जैसी प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक यह खतरा कम नहीं होगा।  

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