आजादी के 77 साल बाद भी बुंदेलखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां अभी भी लोगों को विकास की दरकार है। सरकारों के विकास के दावों के बीच यहां ऐसी तस्वीरें सामने आ जाती हैं, जो यह बताती हैं कि यहां का सिस्टम अभी भी खटिया पर ही है।
सागर जिले की देवरी तहसील के कई गांव ऐसे हैं जहां सरकारी रास्तों पर दबंग किसानों का कब्जा होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती है। ऐसे में गांव के मरीजों और मृतकों को लाने-ले जाने के लिए खटिया का सहारा लेना पड़ता है। गांव के लोग पैदल पगडंडी के रास्ते 1 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। शनिवार को भी एक वृद्ध महिला को खटिया पर रखकर परिजनों ने 1 किलोमीटर का रास्ता तय किया। मामला गौरझामर के पास नयानगर ग्राम पंचायत के अंतर्गत ग्राम सरदई और सिद्धों के टोला का है।
जानकारी के अनुसार, लंबे समय से बीमार काशीराम लोधी की मां कमलरानी (75) की इलाज के दौरान बीएमसी में मृत्यु हो गई थी। सुबह जब मृतका को लेकर परिजन एंबुलेंस के साथ ग्राम सरदई पहुंचे, तो वह घर तक नहीं पहुंच सकी। ऐसे में ग्राम सरदई और सिद्धों के टोला के बीच का 1 किलोमीटर का सकरा और दलदली रास्ता परिजनों ने शव को खाट पर रखकर तय किया, जिसके बाद वे गांव पहुंचे और फिर अंतिम संस्कार किया गया।
परिजन भागीरथ लोधी ने बताया कि कई बार ग्राम पंचायत में गांव के लोगों ने सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिया, लेकिन नयानगर पंचायत द्वारा कोई पहल नहीं की गई। सिद्धों के टोला में 200 से अधिक लोग निवास करते हैं, लेकिन आने-जाने का रास्ता सकरा और खराब है। सरकारी रास्ते में कुछ किसानों ने कब्जा कर रखा है और जगह-जगह सिंचाई होने से सकरी सड़क दलदली हो जाती है। ऐसे में बाइक भी बमुश्किल गांव तक पहुंच पाती है।
भागीरथ ने बताया कि मृतका के पति की मौत के समय भी यही स्थिति थी। एंबुलेंस न पहुंचने के कारण खाट पर ही शव को लाना पड़ा था। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति बीमार हो या मृत, एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती है।