सागर जिले के रहली में कलाकार ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती इको फ्रेंडली गणपति प्रतिमा बनाई है। जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश का संदेश दिया जा रहा है। यह प्रतिमा
पेड़ो की छाल से बनाई गई है तथा साज सज्जा में भी पेड़ की जड़ों का प्रयोग किया गया है।
सागर जिले के रहली में वार्ड क्रमांक 10 कुरयाना मुहल्ले में प्रकृति संरक्षण का संदेश देती हुई बुद्धि के देवता भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है। वृक्षों एवं वन संपदा के संरक्षण का संदेश देने के मकसद से यहां एक मूर्तिकार ने हरे भरे वृक्षों को बिना क्षति पहुंचाए आम की छाल, बरगद के पेड़ की अनउपयोगी जड़ों से श्रीगणेश प्रतिमा का निर्माण किया है। मूर्तिकार द्वारा श्रीगणेश पंडाल के डेकोरेशन के लिए पेड़ों की जड़ों का उपयोग किया है।
प्रकृति संरक्षण का संदेश देने वाली इस झांकी को देखने लोगो की भीड़ उमड़ रही है। पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए सजाई गई इस झांकी के मूर्तिकार विजय प्रजापति का कहना है कि इस बार गर्मियों के असहनीय गर्मी का सामना करना पड़ा, जिसका मुख्य कारण प्राकृतिक असंतुलन है। प्रकृति को संतुलित रखने के लिए पेड़ अति आवश्यक है। एक पेड़ 100 प्राणों के बराबर होता है। प्रकृति संरक्षण एवं अधिक से अधिक पेड़ लगाने के उद्देश्य से आम की छाल, बरगद के पेड़ की जड़ों इत्यादि से भगवान गणेश की प्रतिमा का निर्माण किया है।