राजगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 4 से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पाटन गांव में सीताफल के पेड़ों का घना जंगल है, जहां निवास करने वाले ग्रामीण अपने अपने बगीचे से फल तोड़कर बाजारों में बेचते है और कुछ प्रदेश के अलग-अलग हिस्से में भी सप्लाई करते हैं, जिसकी डिमांड राजस्थान तक भी है।
आपको बता दें ठंड की शुरुआत होते ही बाजारों में सीताफल की आवक बढ़ना शुरू हो जाती है। शुरुआत में जहां ग्रामीण अपने छोटे बगीचे में से इन सीताफलों को तोड़कर बाजार में बेचने के लिए लाते हैं। जैसे-जैसे ही इसकी आवक बढ़ती है और ये व्यापारियों के पास भी पहुंचने लगते है और इनके दाम दो गुना से 3 गुना तक पहुंच जाते हैं, क्योंकि जितना बड़ा सीताफल होगा उसका उतना ही ज्यादा दाम होगा।
गौरतलब है कि अलग-अलग तरह के विटामिंस, आयरन और पौष्टिक गुणों से भरपूर सीताफल मानव शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ क्षेत्र के बाद राजगढ़ के पाटन गांव में सीताफलो के पेड़ों का एक घना जंगल है और यहां निवास करने वाले ग्रामीण गेहूं, चने के साथ साथ सीताफल की भी खेती करते हैं और उन्हें जिले के साथ साथ प्रदेश के अलग-अलग साथ स्थानों में भी सप्लाई किया जाता है।
गांव के सुनील गुर्जर बताते हैं कि वे एक छात्र हैं और स्नातक कर रहे हैं। फिलहाल तो वे पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन ये घर का व्यवसाय है इसलिए परिवार का हाथ बटाने के लिए यहां काम करते और उनके साथ मजदूर भी लगे हैं। साल में एक से दो महीने में निकलने वाली इस फसल में लगभग एक से डेढ़ लाख रूपये तक का मुनाफा उनके परिवार को हो जाता है।
गांव में ही निवास करने वाले भोला का कहना है कि वे राजगढ़ के बाजार में ही अपने फल ले जाकर बेचते हैं और एक से डेढ़ लाख रुपये कमा लेते हैं। फल की कीमत 10 रुपये से लेकर 50 रुपये तक होती है, जितना ज्यादा बड़ा फल होता है उसकी उतनी ही ज्यादा कीमत होती है। सीताफल के जंगल का ठेकेदार लेने वाले अनवर अंसारी का कहना है कि वे प्रतिवर्ष बगीचे का ठेका लेते हुए आ रहे हैं, और उन्हें यहां से अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है।