मध्यप्रदेश के नीमच जिला मुख्यालय से करीब 36 किलोमीटर दूर स्थित है ग्राम पंचायत मड़ावदा का गांव रानपुर। गांव में 150 घरों की आबादी है, सभी मधुमक्खियों से अभी तक दहशत में हैं, क्योंकि घटना के पांच दिन बाद भी नीमच जिला प्रशासन ने आंगनवाड़ी केंद्र के नजदीक एक पेड़ पर लगे मधुमख्खी के छत्ते को नहीं हटाया है। हालात तो यह हैं कि नीमच से लेकर भोपाल तक के जनप्रतिनिधियों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं और साहसी रसोइया कंचनबाई के अदम्य साहस की प्रशंसा की और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर स्वर्गीय कंचनबाई के बलिदान को याद रखने की बात कही है, लेकिन ताज्जुब की बात तो यह है कि महिला एवं बाल विकास के अधिकारी सहित कोई भी प्रशासनिक अधिकारी इस हृदय विदारक घटना के बाद नहीं पहुंचा है। अभी भी मौत का छत्ता भनभना रहा है। अब सवाल उठता है कि नीमच जिला प्रशासन को और घटना का इंतजार है।
जावद तहसील के ग्राम रानपुर में मातम पसरा हुआ है। 2 फरवरी 2026 को जब रसोइया कंचनबाई आंगनवाड़ी के बच्चों को खाना खिलाकर हैंडपंप के पास पानी पिलाने ले गई तो उसी के सामने लगे पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता था। मक्खियों ने हमला किया। कोई कुछ समझता उससे पहले कंचन बाई ने अपनी साड़ी उतारी और बच्चों की तरफ दौड़ लगा दी, बच्चों को ढका। कंचनबाई ने अपनी जान देकर 25 बच्चों की जान बचाई थी। घटना के बाद से ही उक्त आंगनवाड़ी केंद्र पर ताला लगा हुआ है, वहीं गांव के हर घर शोक में डूबा है। आंनगवाड़ी केंद्र भवन की स्थिति शीर्ण—शीर्ण में है, भवन की दीवार पर दरारें पड़ी हुई है, वहीं केंद्र के नजदीक एक हैंडपप है, जहां पर पूरा गांव इसी हैंडपंप से प्यास बुझाता है। पास में मधुमख्खियों का छत्ता होने के कारण ग्रामीण दूर कुओं से पानी लाने पर मजबूर हो रहे हैं। कंचनबाई को मौत की नींद सुलाने वाले इस छत्ते को नहीं हटाने के कारण ग्रामीणों में आक्रोश है।
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मड़ावदा ग्राम पंचायत के सरपंच लालाराम रावत इस घटना से बेहद दुखी हैं। वे कहते हैं, कंचन बाई बहुत संघर्षशील महिला थीं। इस हादसे ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। मेरा पहला प्रयास गांव में मौजूद मधुमक्खियों के छत्तों को सुरक्षित रूप से हटाने का है। विधायकजी व अधिकारियों से मांग की है कि जल्द मधुमक्खियों का छत्ता हटाया जाए।
दहशत में जी रहे गांववाले
ग्रामीण दिलीप मेघवाल ने बताया कि घटना दो फरवरी 2026 को हुई थी। 6 फरवरी 2026 तक कोई प्रशासनिक अधिकारी गांव नहीं आया है, पेड़ पर अभी भी मधुमक्खियां बैठी हुई हैं। दोपहर के समय एक बार मधुमक्खियां उड़ती हैं तो पूरा गांव घर में ही दुबक जाता है। ग्रामीण दहशत में जी रहे हैं। वहीं पीने के पानी की दिक्कत आ रही है, क्योंकि गांव में एक मात्र हैंडपंप है, जो मधुमक्खी के छत्ते के पास ही है। इसलिए कोई वहां पर नहीं आ रहा है।
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जब सीएम ने पोस्ट की तो अपने बयान से पीछे हटा प्रशासन
कंचनबाई के साहसी कार्य की खबर नेशनल खबर बनी तो नीमच जिला प्रशासन ने इस बात का खंडन किया कि कंचनबाई की मौत बच्चों को बचाने के लिए दौरान नहीं हुई है। बच्चों को अन्य शिक्षिका ने बचाया था। कंचनबाई खुद मधुमक्खियों के हमले के कारण आंगनवाड़ी केंद्र में घुस गई थीं। यह बयान जारी कर प्रशासन अपने दायित्व से पल्ला झाड़ता हुआ नजर आया। जब मामले ने तूल पकड़ा। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा व मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता ने पूरी स्थिति से सीएम डॉ. मोहन यादव को अवगत कराया और 5 फरवरी 2026 को जब सीएम ने फेसबुक व एक्स पर बहन कंचनबाई के बारे में पोस्ट की और कंचनबाई के बच्चों को खर्चा सरकार उठाने व चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने के आदेश दिए तो नीमच जिला प्रशासन नरम पड़ा और उस बयान से पीछे हटा। बाद में सीएम डॉ. मोहन यादव द्वारा स्वर्गीय कंचनबाई की मदद करने के संंबंधित खबर जारी की।
दलित नेता ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस घटना के बाद समीपवर्ती विधानसभा मल्हारगढ के कांग्रेस नेता श्यामलाल जोकचंद रानपुर गांव पहुंचे। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र की जर्जर हालत और मधुमक्खियों के छत्ते को अभी तक नहीं हटाने पर आंदोलन की बात कही है।