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Narmadapuram News: डॉक्टरों का इंतजार कर रहे संजीवनी क्लिनिक, तैयार इमारतों में लटके ताले, मरीज अब भी परेशान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम Updated Fri, 19 Jun 2026 08:35 PM IST

नर्मदापुरम शहर में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर बनाए गए मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक अब खुद व्यवस्था की राह देख रहे हैं। जिन केंद्रों से लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधा मिलनी थी, वही भवन आज बिना उपयोग के खड़े हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी यहां न डॉक्टर पहुंचे, न मरीजों के लिए इलाज की शुरुआत हो सकी।

नर्मदापुरम में छह संजीवनी क्लिनिक बनाने की योजना तैयार की गई थी। इनमें से तीन केंद्रों की इमारतें बनकर तैयार हो चुकी हैं और स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी गई हैं। इसके बावजूद अब तक इनमें ओपीडी शुरू नहीं हो सकी है। एक भवन को विभाग को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि दो जगहों पर निर्माण का काम अभी बाकी है। तैयार भवनों की मौजूदा हालत लोगों को परेशान करने वाली है। हाउसिंग बोर्ड इलाके में बने क्लिनिक परिसर में साफ-सफाई की कमी नजर आ रही है। खाली पड़े स्थान पर कचरा जमा हो गया है और चारों तरफ हरियाली की जगह झाड़ियां फैल चुकी हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय से बंद पड़े भवनों की देखरेख नहीं होने से उनकी हालत लगातार खराब हो रही है।

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दशहरा मैदान में बने स्वास्थ्य केंद्र का भी यही हाल है। स्थानीय लोगों के मुताबिक शाम के समय यहां लोगों की आवाजाही कम होने से गलत गतिविधियों का खतरा बना रहता है। वहीं प्रताप नगर में तैयार किया गया क्लिनिक भी उपयोग शुरू होने से पहले ही रखरखाव की कमी झेल रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर ये केंद्र चालू हो जाएं तो सामान्य बीमारी, जांच और प्राथमिक उपचार के लिए उन्हें बड़े अस्पतालों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अभी छोटी परेशानी में भी लोगों को दूर जाना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

नगर पालिका ने हाउसिंग बोर्ड, ग्वालटोली, प्रताप नगर, दशहरा मैदान, भीलपुरा और मालाखेड़ी में इन स्वास्थ्य केंद्रों की इमारतें तैयार करवाई हैं। नियमों के अनुसार भवन मिलने के बाद मरीजों को सेवा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होती है। विभाग के अनुसार डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की कमी के चलते शुरुआत नहीं हो पाई है। सीएमएचओ डॉ. नरसिंह गेहलोत ने बताया कि स्टाफ की व्यवस्था के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अनुमति मिलते ही कर्मचारियों की नियुक्ति कर केंद्रों को शुरू किया जाएगा।

अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्षों से इंतजार कर रहे लोगों को यह सुविधा कब तक मिलती है क्योंकि अगर समय रहते इन भवनों में गतिविधियां शुरू नहीं हुईं, तो करोड़ों की स्वास्थ्य योजना सिर्फ खाली इमारतों तक सीमित होकर रह जाएगी।

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