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Mandsaur News: 'मनोहरलाल धाकड़ को फंसाने की साजिश', वकील बोले-फर्जी है वीडियो

Tue, 27 May 2025 08:05 PM IST
मंदसौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंदसौर

मंदसौर में वायरल हुए अश्लील वीडियो के मामले में जमानत पर रिहा हुए मनोहरलाल धाकड़ के वकील संजय सोनी ने कहा है कि यह पूरी साजिश है और वीडियो फर्जी है। उनका कहना है कि इस वीडियो के जरिए मनोहरलाल को बदनाम किया जा रहा है। अब वे इस वीडियो को वायरल करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। रविवार को पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद मनोहरलाल धाकड़ को गिरफ्तार किया था। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 286 समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया। कोर्ट ने वकील की दलीलों को सुनने के बाद उन्हें जमानत दे दी।

वकील संजय सोनी ने कहा कि आजकल AI तकनीक से किसी का भी चेहरा लगाकर नकली वीडियो बनाए जा सकते हैं। पुलिस ने बिना जांच किए ही जल्दीबाजी में केस दर्ज कर लिया। जब वीडियो की सही जांच होगी, तब सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने कहा कि हम अदालत में सभी सच्चे सबूतों के साथ मनोहरलाल का पक्ष रखेंगे और वीडियो फैलाने वालों पर मानहानि का केस करेंगे।

कुछ दिन पहले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें मनोहरलाल धाकड़ एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहे थे। इस वीडियो से बीजेपी की छवि पर असर पड़ा क्योंकि मनोहरलाल की पत्नी जिला पंचायत में बीजेपी समर्थित सदस्य हैं। हालांकि, पार्टी ने सफाई दी कि मनोहरलाल बीजेपी के प्राथमिक सदस्य नहीं हैं। पुलिस के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर काम करने वाले कुछ कर्मचारी मनोहरलाल को ब्लैकमेल कर रहे थे। उनके पास सीसीटीवी फुटेज था, और जब उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उन्होंने वीडियो वायरल कर दिया। पुलिस अब इस ब्लैकमेलिंग की जांच कर रही है।

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मनोहरलाल ने यह भी कहा है कि वीडियो में दिखाई दे रही महिला और कार से उनका कोई संबंध नहीं है। पुलिस वीडियो की असलियत की जांच कर रही है और और भी सबूत जुटा रही है। भानपुरा पुलिस ने बताया कि मनोहरलाल ने एक व्यक्ति बनेसिंह को 20 हजार रुपये नकद और 5 हजार रुपये ऑनलाइन दिए थे। अब पुलिस बनेसिंह को ढूंढ रही है और उसे भी मामले में आरोपी बनाया जाएगा। एक्सप्रेसवे पर काम करने वाले जिन कर्मचारियों को कंपनी ने नौकरी से निकाला है, उनकी जानकारी पुलिस ने अब तक सार्वजनिक नहीं की है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस की जांच की धीमी गति पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं।

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