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Khargone: दगड़खेड़ी के आदिवासी किसानों का आंदोलन छठे दिन भी जारी, तहसीलदार को भेंट की पेसा नियमों की पुस्तक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन Updated Sat, 13 Jun 2026 06:49 PM IST

भगवानपुरा तहसील के ग्राम दगड़खेड़ी के आदिवासी किसानों का भूमि अधिकारों को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को छठे दिन भी जारी रहा। भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा भगवानपुरा तहसील कार्यालय के बाहर धरने पर डटे रहे।

आंदोलन के दौरान किसानों ने तहसीलदार को मध्य प्रदेश पेसा नियम, 2022 की एक प्रति भेंट कर प्रशासन का ध्यान कानून में निहित प्रावधानों की ओर आकर्षित किया। किसानों का कहना है कि शासन ने पेसा नियमों के प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन को इन नियमों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसी कारण उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से पेसा नियमों की पुस्तक भेंट की।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कई किसानों की जमीन सरकारी रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज हो गई है, जबकि उनके पास दशकों पुराने दस्तावेज, पावती और अन्य प्रमाण मौजूद हैं। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से भूमि रिकॉर्ड में सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। आंदोलन के छठे दिन भाजपा पदाधिकारी चंदर सिंह वासकले भी धरनास्थल पहुंचे और किसानों से चर्चा की। उन्होंने प्रशासन से किसानों की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की।

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किसानों ने बताया कि मध्य प्रदेश पेसा नियम, 2022 के नियम-17 के अनुसार ग्राम सभा भूमि अभिलेखों में विसंगतियों और उनके सुधार संबंधी मामलों में अनुशंसा कर सकती है। इसके बावजूद प्रशासन रिकॉर्ड सुधार की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय केवल जांच और समय मांगने की बात कर रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि छह दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने न तो भूमि अभिलेखों के गायब होने की जिम्मेदारी तय की है, न ही रिकॉर्ड सुधार की कोई समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत की है। साथ ही ग्राम सभा की अनुशंसाओं पर हुई कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट नहीं की गई है। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष केवल जमीन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राम सभा के अधिकारों, पेसा कानून के सम्मान और आदिवासी समुदाय के अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि जब तक भूमि अभिलेखों में सुधार सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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