मध्यप्रदेश में खरगोन जिले के मेनगांव ब्लॉक में आने वाले पिपराटा ग्राम में एक अनोखा विवाह संपन्न हुआ, जो अब सुर्खियों में बना हुआ है। दरअसल, यह विवाह संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा और संविधान की प्रतिकृति को साक्षी मानकर दूल्हे जितेंद्र और दुल्हन वेदिका द्वारा सम्पन्न किया गया। दोनों ने संविधान की उद्देशिका की शपथ लेकर एक दूसरे को पति-पत्नी मानने की प्रतिज्ञा ली।
इस दौरान दूल्हा-दुल्हन ने एक दूसरे को वरमाला डालने से पहले बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उसके बाद मौजूद करीब हजार से अधिक मेहमानों ने भी बाबा साहब की प्रतिमा और दूल्हा-दुल्हन पर पुष्प बरसाए और समाज में समानता का भाव लाने का संकल्प लिया। बता दें कि यह विवाह बस स्टैंड क्षेत्र में सहायक शिक्षक राधेश्याम वर्मा के पुत्र का विवाह समारोह था। इसमें दूल्हा-दुल्हन के साथ विवाह समारोह में शामिल मेहमानों ने भी बाबा साहब सहित गौतम बुद्ध के सिद्धांतों का जीवन में पालन करने की बात कही।
बाबा साहब के संविधान की वजह से मिले हैं अधिकार
वहीं, इस अनूठे विवाह को लेकर दूल्हे जितेंद्र वर्मा ने बताया कि आज हमें जो भी अधिकार मिले हैं, वे सब डॉक्टर बाबा साहब भीमराव आंबेडकर जी की वजह से लिखे संविधान की वजह से मिले हैं। इसीलिए आज बाबा साहब को साक्षी मानकर हम विवाह के गठबंधन में बंधे हैं और जिस तरह से डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं तथागत गौतम बुद्ध नए संपूर्ण विश्व में ज्ञान और समानता का भंडार पहुंचा है, उसका अनुसरण करते हुए आज हमने बाबा साहब की प्रतिज्ञा लेकर अपने विवाह को संपन्न किया है। हमें इस तरह से विवाह करने पर बड़ा ही अच्छा लग रहा है। क्योंकि हम जो अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, अच्छे कपड़े पहन रहे हैं, अच्छा खाना खा रहे हैं और स्कूलों में जा पा रहे हैं। यह सुविधा और इसके आधार अधिकार हमें सिर्फ सिर्फ बाबा साहब के लिखे संविधान की वजह से मिले हैं।
बहुजन समाज से भी की ऐसी ही अपील
वहीं, दूल्हे जितेंद्र ने बताया कि वे बड़े ही खुशनसीब और बाबा साहब के ऋणी हैं, जो आज बाबा साहब के बताए मार्ग पर चलकर वे और उनकी पत्नी वेदिका वर्मा शादी के बंधन में बंधे हैं। वे अब संपूर्ण बहुजन समाज से भी अपील करते हैं कि वो सभी लोग भी इसी तरह से बाबा साहब के मार्ग पर चलते हुए शादी करें। क्योंकि उनके विचारों की वजह से ही सभी समान भाव से देश में रह रहे हैं और उनसे प्रेरित होकर ही समाज में उनके सिद्धांतों को प्रसारित करने के लिए विवाह का ऐसा आयोजन रखा गया है।