मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में धूनीवाले दादाजी धाम की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के साथ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का बड़ा मामला सामने आया है। दरअसल गुरु पूर्णिमा पर्व पर धूनीवाले दादाजी धाम में दर्शन के लिए पूरे देश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु खंडवा पहुंच रहे हैं। धार्मिक आस्था से ओतप्रोत इन भक्तों का स्वागत जगह-जगह निशुल्क भंडारों और जलसेवा के माध्यम से किया जा रहा है, लेकिन इस श्रद्धा और भक्ति के माहौल को ठेस पहुंचाने वाली एक गंभीर और संवेदनशील घटना सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, रविवार को बोरगांव बुजुर्ग गांव से पैदल यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं का एक समूह खंडवा के पंधाना थाना क्षेत्र के डुल्हार गांव के पास स्थित राजवीर ढाबा पर भोजन के लिए रुका। उन्होंने ढाबे से सेव टमाटर की सब्जी और रोटी मांगी, परंतु परोसे गए भोजन में मटन की मिलावट पाई गई। जब श्रद्धालुओं ने सब्जी में मांस के टुकड़े देखे, तो वे भड़क उठे और मौके पर हंगामा हो गया।
सूचना मिलते ही हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता घटनास्थल पर पहुंचे और पंधाना पुलिस को मामले से अवगत कराया गया। जांच में सामने आया कि ‘राजवीर ढाबा’ नाम से चल रहे इस प्रतिष्ठान को मुस्लिम युवक जावेद चला रहा था।
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प्रशासन की सख्त कार्रवाई
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीएम पंधाना दिनेश सावले और एसडीएम खंडवा बजरंग बहादुर सिंह ने तत्काल मौके पर पहुंचकर ढाबे को सील करने के आदेश दिए। पुलिस ने ढाबा संचालक जावेद और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में ले लिया, और पूछताछ के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध शराब भी जब्त की गई है।
सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों में आक्रोश
मामले से कई संगठनों में आक्रोश रहा। उन्होंने नाराजगी जताते हुए मांग की है कि जिले के सभी ढाबों और होटलों पर संचालकों के नाम स्पष्ट रूप से दर्शाए जाएं। गुरु पूर्णिमा पर्व के दौरान तीन दिनों तक खंडवा जिले में मांस और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
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उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर मांग
घटना के बाद जिले में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरह धार्मिक स्थलों और मेलों के दौरान विशेष निगरानी और प्रतिबंध लागू करने की मांग तेज़ हो गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आस्था की रक्षा के लिए प्रशासन से सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की अपेक्षा की जा रही है। बता दें कि हर साल धूनीवाले दादाजी की समाधि पर शीश नवाने के लिए हजारों श्रद्धालु खंडवा पहुंचते हैं। पैदल यात्राओं के मार्ग में भंडारे और सेवा केंद्र लगते हैं।