मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर क्षेत्र में पांच दिन पहले एक घायल तेंदुआ मिला था, जिसकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई। माना जा रहा था कि तेंदुआ किसी वाहन से टकराने के कारण घायल हुआ था। तेंदुए के घायल होने की खबर मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए, जिनमें से कुछ ने तेंदुए के साथ छेड़छाड़ की। एक वीडियो में एक ग्रामीण तेंदुए की पूंछ पकड़ने की कोशिश करता हुआ भी दिखाई दिया।
ग्रामीणों से सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक कुछ लोग घायल तेंदुए के साथ वीडियो बनाने के चक्कर में उसे परेशान कर चुके थे। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसके बाद एनिमल राइट्स के लिए काम करने वाली संस्था पेटा की सदस्य और भाजपा नेता मेनका गांधी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने खंडवा वन विभाग पर सवाल उठाते हुए इस मामले में कार्रवाई की मांग की।
मेनका गांधी की चिट्ठी और आपत्ति
मेनका गांधी ने भोपाल स्थित वन विभाग के चीफ विजयकुमार अंबाडे को पत्र लिखकर तेंदुए की मौत पर चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों ने लापरवाही बरती है, उन्हें सस्पेंड किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने प्रदेश में 4 वन्यजीव अस्पताल बनाने की भी सलाह दी। उनका कहना था कि वन विभाग की टीम को सूचना मिलने के बावजूद मौके पर देरी से पहुंचने के कारण ग्रामीणों ने तेंदुए के साथ छेड़छाड़ की, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई।
वन विभाग की सफाई और कार्रवाई
खंडवा के डीएफओ राकेश कुमार डामोर ने इस मामले में लापरवाही से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वन विभाग की टीम सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गई थी और तेंदुए को इलाज के लिए इंदौर भेजा गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। तेंदुए की पूंछ से छेड़छाड़ करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामला तेंदुए की मौत के साथ ही ग्रामीणों द्वारा वन्यजीवों के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मुद्दा बन गया है, और इस पर पशु अधिकारों के पक्षधरों ने कड़ी नाराजगी जताई है।