खंडवा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गंभीर घायल को लेकर जा रही लिफ्ट आधी रात को आधा घंटा से अधिक समय तक फंसी रही। इसमें मरीज, अटेंडर सहित कुल सात लोग सवार थे। घटना बुधवार गुरुवार की दरम्यानी रात 12 बजे के आसपास की बताई जा रही है। लिफ्ट में फंसे लोगों द्वारा पूरे मामले का वीडियो भी बनाया गया है।
बता दें कि एक युवक को गंभीर अवस्था में मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया था। युवक के पेट में गंभीर चोट के चलते डॉक्टरों ने पेट का एक्स-रे करने ग्राउंड फ्लोर पर भेजा था। इसी दौरान लिफ्ट अटक गई। लिफ्ट फंसने की घटना के बाद हड़कंप मच गया। लिफ्ट में फंसे परेशान लोगों ने तुरंत लिफ्ट सुपरवाइजर को फोन किया, लेकिन फोन लगातार बिजी आता रहा। इधर घायल युवक आधा घंटा से अधिक समय तक जिंदगी मौत से जूझता रहा।
जैसे तैसे घायल युवक और अन्य लोगों को लिफ्ट से बाहर निकाला गया। पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन और लिफ्ट का रखरखाव करने वाली ठेकेदार कंपनी की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विदित हो, मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो लिफ्ट से मरीज और अटेंडर चौथी मंजिल तक आना जाना करते हैं, गंभीर मरीजों को फोर्थ फ्लोर पर उपचार की व्यवस्था है। एक लिफ्ट पहले ही बंद है। दूसरी लिफ्ट पर लोड बढ़ने की वजह से वो भी बार बार अटक रही है।
टेक्निकल समस्या के चलते हुई थी लिफ्ट बंद
वहीं इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से डॉक्टर रंजीत बडोले ने बताया कि उनके संज्ञान में भी यह मामला आया था जोकि देर रात करीब 12:00 बजे के आसपास का है। वहां कुछ पेशेंट और कुछ लोग थे, तब लिफ्ट में कुछ समय के लिए, कुछ टेक्निकल खराबी की वजह से, कुछ देर के लिए लिफ्ट में यह समस्या आई थी। इसके बाद हमारे द्वारा जो सब स्टेशन पर इंचार्ज है उनसे संपर्क किया गया था और कुछ समय में ही वह लिफ्ट चालू करवा दिया गया था। उस दौरान जो मरीज इस लिफ्ट में थे, उनकी हालत भी अभी ठीक है। उन्हें भी कोई समस्या नहीं है। हमारे द्वारा जो सब स्टेशन है वहां पर लाइट मेन की 8-8 घंटे की ड्यूटी लगाई गई है और इसी तरह लिफ्ट अटेंडर की भी ड्यूटी 8-8 घंटे की लगाई गई है।
जांच के बाद की जाएगी कार्रवाई
वहीं जब डॉक्टर बड़ोले से पूछा गया कि लिफ्ट में फंसे लोगों ने वहां लिखे इमरजेंसी नंबरों पर भी कांटेक्ट किया था। बावजूद इसके उस फोन नंबर से किसी तरह का रिस्पांस नहीं मिला था। तब उन्होंने कहा कि अगर इस तरह से कुछ हुआ है तो इसकी जांच कार्रवाई जाएगी, और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। हम इसको दिखवाएंगे कि यदि नंबर लगाया गया है, और वह नंबर बंद आया है, तो उसकी क्या वजह रही है। चूंकि 8-8 घंटे की ड्यूटी रहती है तो हो सकता है जिसका नंबर लगाया गया हो, वह ड्यूटी पर ही ना हो, और उसकी जगह कोई और ड्यूटी पर हो। लेकिन इसकी जांच के बाद यदि कुछ लापरवाही आएगी तो जरूर कार्रवाई की जाएगी।