मध्यप्रदेश की राजनीतिक गलियारों में एक बार पूर्वमंत्री व विधायक संजय पाठक ने हलचल मचा दी है। अपनी विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के एक निजी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने मध्यवर्ती चुनाव की घोषणा की है। भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक की मानें तो इस बार उन्होंने कहा है कि 51 प्रतिशत से कम वोट मिलने पर वो विधायकी से इस्तीफ़ा दे देंगे। अपने इस सियासी बयान को लेकर वो काफी चर्चाओं में आ गए हैं।
दरअसल विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक के इस पंचवर्षी चुनाव के ढाई वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है इस लगातार वो विवादों में भी बने रहे, ऐसे में खुद कार्यों का जनता के बीच जाकर मूल्यांकन करने की घोषणा की है। खास बात यह है कि उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि उन्हें 51 फीसदी से कम समर्थन मिला तो वे विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। यह घोषणा उन्होंने नगर परिषद कैमोर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंच से की।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि विधायक बने हुए दो वर्ष से अधिक समय हो चुका है और अब यह जानना जरूरी है कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं या नहीं। इसके लिए वे मध्यवर्ती चुनाव की तर्ज पर जनादेश जैसी प्रक्रिया अपनाएंगे और घर-घर जाकर लोगों से राय लेंगे। संजय सत्येंद्र पाठक ने कहा कि वे स्वयं जनता के बीच पहुंचकर पूछेंगे कि क्या वे इस पद पर बने रहने के योग्य हैं या नहीं। यदि जनता उन्हें 51 फीसदी से अधिक समर्थन देती है तो वे अपना कार्य जारी रखेंगे, अन्यथा उसी दिन पद छोड़ देंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि मई-जून के आसपास यह प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव से पूर्व भी पूर्वमंत्री व विधायक संजय पाठक ने इसी तरह जनादेश कराया था, जिसमें उन्हें लगभग 75 फीसदी समर्थन मिला था। इसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक का नाम कई विवादों से भी जुड़ा रहा है। ऐसे में उनके इस फैसले को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता उनके इस प्रयास को किस नजर से देखती है और क्या यह कदम उनके राजनीतिक भविष्य को नई दिशा देता है।