जिले के तजपूरा निवासी 70 वर्षीय भगवत सिंह राजपूत मंगलवार को जनसुनवाई में एक गंभीर शिकायत लेकर पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें बाहर निकलवा दिया। पीड़ित बुजुर्ग का आरोप है कि उनकी पैतृक जमीन की रजिस्ट्री धोखाधड़ी से किसी और के नाम पर कर दी गई है, और वह बीते पचास वर्षों से न्याय के लिए भटक रहे हैं।
भगवत सिंह का कहना है कि यह जमीन उनके पिता ने खरीदी थी, लेकिन समय के साथ अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत से यह जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज हो गई। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी जमीन पर बिना अनुमति के नहर भी बना दी गई है। जब उन्होंने इसकी शिकायत जनसुनवाई में दर्ज करानी चाही, तो अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों को बुलाकर उन्हें बाहर निकलवा दिया।
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पीड़ित ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं पचास साल से अपनी जमीन के लिए लड़ रहा हूं। आज जब न्याय की उम्मीद लेकर जनसुनवाई में आया तो मुझे बाहर निकाल दिया गया। मुझे यह भी नहीं बताया जा रहा कि मेरी जमीन किसने खरीदी और कब रजिस्ट्री हुई।"
इस मामले में हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह जमीन का पारिवारिक विवाद है, जिसमें कोर्ट ने भगवत सिंह के परिवार में बंटवारा कर दिया है। हमने बार-बार इन्हें कोर्ट में अपील करने को कहा है। यहां तक कि इनके लिए वकील की व्यवस्था भी कर दी गई है, लेकिन यह समझने को तैयार नहीं हैं और बार-बार जनसुनवाई में आ जाते हैं।"