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Dindori News: प्रशासन की अनदेखी के बीच ग्रामीणों ने खुद संभाली जिम्मेदारी, चंदा जुटाकर शुरू किया स्कूल निर्माण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डिंडोरी Updated Thu, 02 Jul 2026 02:46 PM IST

जिले के समनापुर विकासखंड के ग्राम भालापुरी के शिकारी टोला में ग्रामीणों ने शिक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब एक वर्ष तक लगातार आवेदन, मांग और इंतजार के बावजूद जब नए प्राथमिक विद्यालय भवन का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो ग्रामीणों ने सरकारी मदद का इंतजार छोड़ स्वयं स्कूल बनाने का निर्णय ले लिया।

ग्रामीणों ने गांव के प्रत्येक परिवार से 500-500 रुपये का सहयोग एकत्र किया है। इसके साथ ही श्रमदान के माध्यम से नए स्कूल भवन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होने दी जाएगी और शिक्षा के लिए अब वे प्रशासन पर निर्भर नहीं रहेंगे।

दरअसल पिछले वर्ष प्राथमिक शाला का पुराना भवन पूरी तरह जर्जर होने के कारण उसे डिस्मेंटल कर दिया गया था। भवन हटने के बाद स्कूल के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया। उस समय पालकों और ग्रामीणों ने अपने प्रयास से झोपड़ीनुमा अस्थायी व्यवस्था तैयार कर बच्चों की पढ़ाई जारी रखी थी। इस समस्या को मीडिया ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिससे उम्मीद जगी थी कि जल्द ही नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थायी भवन निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।

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वर्तमान में विद्यालय के 52 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई गांव के एक मकान के एक ही कमरे में कराई जा रही है। पहली से पांचवीं तक की सभी कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। शिक्षिका का कहना है कि सीमित स्थान और सभी कक्षाओं के एक साथ संचालन के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना बेहद कठिन हो गया है। इससे बच्चों के सीखने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

प्रशासन की लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने अब स्वयं स्कूल भवन निर्माण का बीड़ा उठा लिया है। गांव के लोग आर्थिक सहयोग देने के साथ निर्माण कार्य में श्रमदान भी कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सरकारी व्यवस्था समय पर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही है, तो बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए समाज को आगे आना ही होगा।

भालापुरी के शिकारी टोला का यह प्रयास एक ओर ग्रामीणों की एकजुटता, जागरूकता और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है, तो दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा करता है कि करोड़ों रुपये के विकास बजट और शिक्षा योजनाओं के बावजूद एक छोटे से गांव को अपने बच्चों के लिए स्कूल भवन स्वयं क्यों बनाना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की इस पहल के बाद जिला प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह जाता है।  

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