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Damoh News: प्राचीन मंदिर से 153 वर्ष से निकाली जा रही भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, हजारों लोग होते हैं शामिल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Updated Wed, 25 Jun 2025 04:22 PM IST

दमोह जिले के प्राचीन जगदीश स्वामी मंदिर में रथ यात्रा की बहुत पुरानी परंपरा है। यहां से 153 वर्षों से भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा निकाली जाती है। 27 जून को निकाले जाने वाली भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा की तैयारियां अंतिम दौर में चल रही हैं। भगवान के लिए रथ तैयार किए जा रहे हैं। जिनमें रंग-रोगन के साथ साज-सज्जा का कार्य किया जा रहा है।

गौरतलब है कि शहर में दो रथयात्रा निकाली जाती है। इसमें पहली रथयात्रा पुरैना तालाब स्थित भगवान जगदीश स्वामी मंदिर से निकाली जाती है। वहीं दूसरी रथयात्रा हनुमान गढ़ी मंदिर से निकाली जाती है। इधर भगवान जगन्नाथ 15 दिन के लिए बीमार चल रहे हैं। जिन्हें खाने में दूध, दलिया, मूंग की दाल सहित अन्य हल्के भोजन का प्रसाद दिया जा रहा है। वहीं समय-समय पर वैद्यराज द्वारा भगवान की नाड़ी देखकर औषधि के रूप में काड़ा भी दिया जा रहा है। जगदीश स्वामी मंदिर के पुजारी पंडित नर्मदा प्रसाद गर्ग ने बताया कि 15 दिन बीमार होने के बाद भगवान 27 जून को स्वस्थ होंगे। सुबह से विद्वान पंडितों द्वारा भगवान का अभिषेक पूजन होगा। वहीं शाम 5 बजे से रथ में विराजमान भगवान भक्तों को दर्शन देंगे। रथ यात्रा मंदिर से प्रारंभ होकर टॉकीज तिराहा, बकौली चौराहा, घंटाघर, बड़ापुल होकर पुराना थाना पहुंचेगी। जहां भगवान अपने भक्तों के घर पर निवास करेंगे। वहीं एक दिन पहले 26 जून को भंडारा होगा।

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153 साल पुराना है जगदीश स्वामी मंदिर
पंडित गर्ग ने बताया कि जगदीश स्वामी मंदिर 153 वर्ष प्राचीन है, जो जिले का सबसे प्राचीन मंदिर है। सन 1872 में संत अजबदास महाराज ने इस मंदिर की नींव रखी थी। मंदिर बनने के बाद यहां भगवान जगन्नाथ स्वामी की स्थापना कराई गई थी। तभी से हर साल भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा निकाली जा रही है। इस साल भी यह यात्रा उत्साह से निकाली जाएगी।

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शुरुआत में बैलगाड़ी पर निकाली थी यात्रा
मंदिर के शुरुआती दौर में कुछ वर्षों तक रथयात्रा बैलगाड़ी पर निकाली जाती थी। इसमें भगवान को विराजमान कर शहर में भ्रमण कराया जाता था। पुजारी ने बताया कि यह दक्षिणावर्ती यात्रा होती है। सभी मंदिरों की परिक्रमा भी दक्षिणावर्ती होती है। जब हम दक्षिण परिक्रमा लगाते हैं तभी उसका हमें फल प्राप्त होता है।

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