दमोह जिले के जबेरा क्षेत्र में आने वाले पूरेनहाऊ और टपरियों गांव के बीच पेट्रोल पंप के सामने शनिवार रात सात फीट लंबा मगरमच्छ दिखाई देने के बाद लोगों के होश उड़ गए। मगरमच्छ की सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई टीम मौके पर पहुंची और इस बार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर इसे पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा गया। तब जाकर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
दमोह जिले में इस साल इतने अधिक मगरमच्छ दिखाई दिए हैं जितने लोगों ने आज तक नहीं देखे। जिले की सबसे बड़ी व्यारमा नदी इन मगरमच्छ की शरण स्थली बनी है यहां पर सैकड़ों की संख्या में मगर हैं जो इस साल बारिश में नदी से निकलकर तालाब व अन्य स्थानों पर पहुंच गए हैं जो अब रहवासी इलाकों की ओर जा रहे हैं। शनिवार की रात जो मगरमच्छ पकड़ा गया है। वह 15 दिन से इसी तरह सड़कों पर घूम रहा था।
दमोह-जबलपुर नेशनल हाईवे से लगे रहवासी क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से चहलकदमी करते विशालकाय मगरमच्छ ग्रामीणों को दिखाई दे रहा था। जबेरा के पूरेनहाऊ में दहशत का पर्याय बने मगरमच्छ को शनिवार-रविवार की दरमियानी रात्रि को वन विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद पकड़ने में सफलता हासिल की। पांच घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान वन विभाग की टीम को सफलता मिली है।
इसके पहले कई बार वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन मगर वनकर्मियों के हाथ नहीं लगा था। शनिवार रात 11 बजे पेट्रोल पंप के सामने टपरियों गांव के बीच इलाके में मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना वन विभाग की टीम को मिली।
सिंगौरगढ़ रेंजर कुरैशी, गेम सुपरवाइजर हरलाल रैकवार ने ग्रामीणों की मदद से करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मगरमच्छ का उसका रेस्क्यू किया। इस दौरान मगरमच्छ हमलावर भी हुआ, लेकिन मुश्किल से काबू में आया। इस दौरान वन कर्मियों और ग्रामीणों ने काफी हौसला दिखाया, क्योंकि बिना पर्याप्त संसाधन के मोबाइल टॉर्च एवं टोर्च की रोशनी और नसेनी, रस्सों की मदद करीब एक दर्जन लोगों ने मगरमच्छ का रेस्क्यू करते हुए ट्रैक्टर की ट्रॉली से रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के सिंगौरगढ़ जलाशय तक ले जाया गया। यहां से सुरक्षित जलाशय में छोड़ दिया गया