प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, बस उसे एक मौके का इंतजार रहता है। दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक के भिलोनी गांव की बेटी ने ये साबित कर दिखाया है। किसान परिवार में जन्मी अश्विनी पटेल को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक है, उसने चार साल की छोटी उम्र में बल्ला थामा और क्रिकेट की पिच पर चौके-छक्के लगाने लगी। क्रिकेट में बेटी का जुनून देखकर पिता रामलखन कोच बनकर उसकी मदद कर रहे हैं। रामलखन बेटी के सपने को साकार करने के लिए बचपन से ही अपनी हैसियत के मुताबिक क्रिकेट का हर सामान उसे उपलब्ध करा रहे हैं। अश्वनी हर दिन प्रैक्टिस कर सके इसके लिए रामलखन ने अपने ढाई एकड़ कृषि भूमि में ही एक छोटी सी पिच और नेट लगाकर छोटा ग्राउंड बनावाया है। खेती किसानी के काम से समय निकालकर वह फुर्सत के पलों में अपनी बेटी के साथ रोज क्रिकेट खेलते हैं और उसकी प्रतिभा को निखारने में जुटे हुए हैं। शाम के वक्त गांव और आसपास के दूसरे खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेलकर अश्वनी अभ्यास करती है।
अश्वनी के पिता रामलखन का कहना है कि बेटी क्रिकेटर बनना चाहती है और उसकी लग्न और प्रतिमा को देखकर मैं उसका मनोबल बढ़ा रहा हूं। नौ वर्षीय अश्विनी फिलहाल तीसरी कक्षा में पढ़ती हैं। पढ़ाई के साथ ही वह अपने क्रिकेट के शौक को भी पूरा कर रही है। अश्विनी को क्रिकेट इतना पसंद है कि आसपास के गांव में जहां भी क्रिकेट टूर्नामेंट होते हैं वह अपने पिता रामलखन पटेल के साथ वहां पहुंच जाती है और वहां खिलाड़ियों को खेलते देखकर उनसे क्रिकेट के गुर सीखती है। अश्वनी बड़ी होकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।