छतरपुर: सिद्ध तीर्थ बागेश्वर धाम में बुधवार रात से तीन दिवसीय होली महा महोत्सव की शुरुआत हो गई। पहले दिन फूलों की होली खेली गई, जो धाम के सेवादारों को समर्पित रही।
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस अवसर पर कहा कि होली सनातन परंपरा का प्रतीक है, जो लोगों के जीवन में खुशियों के रंग घोलती है। उन्होंने भगवान बालाजी को गुलाल-अबीर अर्पित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। छोटे बच्चों के साथ अठखेलियां करते हुए उन्होंने सभी को होली की शुभकामनाएं दीं।
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सेवादारों के लिए विशेष आयोजन
महाराज श्री ने तीन सौ से अधिक सेवादारों को समर्पित इस होली उत्सव में विशेष व्यंजन बनवाए और उनके अटूट समर्पण के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि धर्म और त्योहार आपसी मेल-मिलाप और एकता को बढ़ाने का माध्यम हैं।
चित्रलेखा जी के भजनों ने बांधा समां
महोत्सव में कथा वाचिका चित्रलेखा जी ने भजन प्रस्तुत किए, जिससे बागेश्वर धाम वृंदावन की छटा बिखेरने लगा। उनके भजनों पर हजारों श्रद्धालु झूम उठे। उन्होंने "श्याम चंदा है श्यामा चकोरी", "डारो डारो रे रंग बनवारी", "होरी खेले रघुवीरा अवध में" जैसे भजनों की प्रस्तुति दी।
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गरीब बालक को मिला बड़ा मंच
महोत्सव के दौरान महाराज श्री की नजर बिहार से आए 10 वर्षीय आयुष हरिजन पर पड़ी। उन्होंने उसे मंच पर बुलाकर होली के गीतों में नृत्य करने का अवसर दिया। महाराज श्री ने उसे धनराशि, नई अंगवस्त्र और आशीर्वाद देकर सम्मानित किया। होली महा महोत्सव के अगले दो दिनों में धार्मिक अनुष्ठान, भजन संध्या और अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।