राजधानी भोपाल में स्लॉटर हाउस और कथित गौमांस तस्करी के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। इस प्रकरण को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इसकी असली जिम्मेदारी किसकी है। एक ओर शहर सरकार और नगर निगम की भूमिका संदेह के घेरे में है, तो दूसरी ओर विपक्ष लगातार प्रशासन और सत्ताधारी दल पर हमलावर है।
कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले में सीधे तौर पर महापौर, मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) के सदस्यों और तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर को कटघरे में खड़ा करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। साथ ही असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा समेत सभी संदिग्धों का नारकोटिक्स टेस्ट कराने की मांग उठाकर सियासी पारा और चढ़ा दिया है।
कांग्रेस महासचिव अमित शर्मा के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचा, जहां एडिशनल डीसीपी अनिल शर्मा को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रतीकात्मक विरोध के रूप में पीले चावल के साथ ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि भोपाल में गौमांस की अवैध तस्करी लंबे समय से चल रही थी, लेकिन नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत के चलते समय रहते कार्रवाई नहीं हो सकी। कांग्रेस का कहना है कि यदि इस मामले पर पहले ही सख्ती दिखाई जाती, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते।