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Bhopal Garba Pandal : गरबा पंडालों पर कलेक्टर की ऐसी गाइडलाइन..छिड़ गई भाजपा-कांग्रेस के बीच सियासी जंग

Video Desk Amar Ujala Updated Wed, 24 Sep 2025 01:59 PM IST

भोपाल में गरबा पंडालों को लेकर कलेक्टर के आदेश के बाद सियासी जंग छिड़ गई है। बीजेपी और कांग्रेस इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। बीजेपी ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की मांग की है, जबकि कांग्रेस ने इसका विरोध किया है।बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरबा सनातन संस्कृति की पहचान है और इसमें गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाना चाहिए। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि बीजेपी हर त्योहार से पहले जानबूझकर विवाद खड़ा करती है। उन्होंने कहा कि गरबा आयोजन समिति अगर किसी को आमंत्रित करती है तो इसमें किसी और को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे गरबा पंडालों में जाने से परहेज करें ताकि किसी तरह का विवाद न हो... 

भोपाल कलेक्टर ने सोमवार को गरबा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी गरबा पंडालों में सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्य स्थापना और प्रवेश के लिए पहचान पत्र की जांच अनिवार्य कर दी गई है।नवरात्रि के गरबा पांडालों पर विवादित पोस्टर लगाए जाने के बाद मुद्दे पर भोपाल के नायब शहर काजी मौलाना अली कदर ने कहा कि इस्लाम, जिहाद और मुसलमानों को लेकर फैलाई गई गलतफहमियों के कारण ही ऐसे नफरत भरे संदेश सामने आ रहे हैं। अली कदर ने पोस्टरों को आपत्तिजनक करार देते हुए कहा कि प्रशासन को इसका संज्ञान लेना चाहिए। मैं तो वेलकम कहता हूं सांसद जी का बयान या एमएलए साहब का बयान हो। मैं तो कहता हूं आप तो असेंबली में कानून बना दीजिए कि दुनिया में कहीं पर भी कोई भी मुस्लिम गरबा नहीं करेगा। स्कूलों में छोटी बच्चियों को भी गरबा नहीं कराया जाएगा, अगर वो हिंदू नहीं हैं। दुनिया में कहीं पर भी मुसलमान गरबा करते दिखें तो आप उसे फोर्स के जरिए रोक दीजिए। गरबा हिंदुओं का पर्व है, उनके मूल्यों का हिस्सा है। यह कहना है नायब शहर काजी मौलाना अली कदर का। गरबा पांडालों में मुसलमानों की मौजूदगी पर मौलाना अली कदर ने कुरान का हवाला देते हुए कहा कि जहां मानवता, खिदमत और इंसान की मदद का मामला हो, वहां न हिंदू देखो न मुसलमान, बल्कि इंसान की सेवा करो। जब मामला धर्म का हो तो कुरान कहता है 'लकुम दीं वलीया दींन' हमारा धर्म अलग है, आपका धर्म अलग है। इस्लाम तौहीद (एक ईश्वर) पर आधारित मजहब है। अगर किसी आयोजन में है तो मुसलमान वहां शरीक नहीं  हो सकता। ऐसा करना इस्लाम के उसूलों के खिलाफ है।

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