फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MP News: 'ये कागज नहीं, जनता का सोना है', जनसुनवाई में सिंधिया ने कलेक्टर को मंच से लगाई फटकार

Mon, 06 Apr 2026 09:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अशोकनगर

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के ईसागढ़ में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंच से ही प्रशासनिक व्यवस्था पर सख्त नाराजगी जताते हुए कलेक्टर साकेत मालवीय को कड़ी फटकार लगा दी। इस घटना ने न केवल कार्यक्रम में मौजूद लोगों को चौंका दिया, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

दरअसल, जनपद पंचायत परिसर में आयोजित इस जनसुनवाई कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने अपने आवेदन प्रशासन को सौंपे, जिनमें विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत, सामाजिक और राजस्व संबंधी समस्याएं शामिल थीं। कार्यक्रम के समापन के बाद जब इन आवेदनों को एकत्रित कर सुरक्षित रखने की प्रक्रिया शुरू हुई, उसी दौरान अव्यवस्था का दृश्य सामने आया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कलेक्टर साकेत मालवीय द्वारा आवेदनों को एक थैले में बिना किसी क्रम के रखा जा रहा था। कागज इधर-उधर बिखरे हुए थे और उन्हें व्यवस्थित करने का कोई स्पष्ट प्रयास नजर नहीं आ रहा था। यह स्थिति देखते ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तुरंत हस्तक्षेप किया और मंच से ही अपनी नाराजगी जाहिर की।

ये भी पढ़ें- फिर सामने आया भ्रष्टाचार: हाथों से पपड़ी की तरह उखड़ रही डामर की सड़क, 700 मीटर लंबे घटिया निर्माण की पोल खुली

सख्त और स्पष्ट शब्दों में सिंधिया ने कहा, “ये केवल कागज नहीं हैं, ये जनता की उम्मीदें और विश्वास हैं। हमारे लिए ये सोने के समान हैं।” उन्होंने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि जनसुनवाई में आए हर आवेदन को पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालना जरूरी है। इस तरह की लापरवाही न केवल प्रशासन की छवि को धूमिल करती है, बल्कि जनता के भरोसे को भी ठेस पहुंचाती है। सिंधिया ने आगे कहा कि हर आवेदन के पीछे किसी व्यक्ति का दर्द, संघर्ष और उम्मीद जुड़ी होती है। लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए प्रशासन के पास आते हैं और ऐसे में उनकी भावनाओं का सम्मान करना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवेदनों को इस तरह बेतरतीब तरीके से रखना लोगों की भावनाओं के साथ अन्याय के समान है।

केंद्रीय मंत्री की इस कड़ी प्रतिक्रिया के बाद मौके पर ही कलेक्टर साकेत मालवीय ने स्थिति को संभाला और सभी आवेदनों को व्यवस्थित तरीके से फाइलिंग कर सुरक्षित रखा। इसके बाद अधिकारियों ने भी अधिक सतर्कता बरतते हुए प्रक्रिया को दुरुस्त किया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक स्पष्ट संदेश दिया कि जनता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनसुनवाई जैसे मंच, जहां आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, वहां प्रशासन की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। प्रशासन को अपने कार्यों में अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनने की जरूरत है। वहीं, सिंधिया की सख्ती को कई लोगों ने सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे अधिकारियों को जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का अहसास होगा और भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचा जा सकेगा।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें