अशोक नगर जिले में बेखौफ चल रहे चावल के अवैध व्यापार पर प्रशासन का दखल हुआ है। कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी के निर्देश पर गुरुवार को प्रशासन की टीम ने मुंगावली विधानसभा क्षेत्र के अथाईखेड़ा कस्बे से चावल से भरा एक ट्रैक्टर पकड़ा। नायब तहसीलदार एके गौतम और राजस्व विभाग की टीम ने ट्रैक्टर-ट्राली से प्लास्टिक की बोरियों में भरे 66 कट्टे चावल जब्त किए।
अंदेशा है कि यह चावल पीडीएस का है और राशन की दुकानों से इसकी कालाबाजारी की जा रही थी। प्रशासन की टीम के पहुंचते ही ट्रैक्टर चालक वाहन छोड़कर भाग खड़ा हुआ। नायब तहसीलदार ने अपने निजी ड्राइवर की मदद से चावल से भरे ट्रैक्टर को जब्त कर पुलिस अभिरक्षा में रखवा दिया। शुक्रवार को पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्राली और चावल खाद्य विभाग को सुपुर्द कर दिया।
ट्रैक्टर पर नहीं लगी नंबर प्लेट, मालिक भी गायब
अवैध रूप से चावल का परिवहन करते हुए प्रशासन ने जिस सोनालिका ट्रैक्टर को पकड़ा है, उस पर आगे और पीछे कोई नंबर प्लेट नहीं लगी थी। संभवतः राशन माफिया पीडीएस के चावल के परिवहन में बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों का प्रयोग करते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि जब खाद्य आपूर्ति अधिकारी प्राची शर्मा शुक्रवार को जब्त ट्रैक्टर-ट्राली और चावल की जांच करने पहुंचीं तो न तो ट्रैक्टर का मालिक थाने आया और न ही चावल के संबंध में कोई जिम्मेदारी लेने वाला व्यक्ति पहुंचा। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि राशन माफिया के हौसले कितने बुलंद हैं। फिलहाल खाद्य आपूर्ति अधिकारी प्राची शर्मा ने प्रतिवेदन बनाकर कलेक्टर को भेज दिया है। जब्त चावल को शासकीय वेयरहाउस मुंगावली में और ट्रैक्टर-ट्राली को बहादुरपुर पुलिस थाने में सुरक्षित रखा गया है।
माफिया पर होगी एफआईआर या फिर राजसात की कार्रवाई
जांच के बाद चावल के संबंध में कोई व्यापारी सामने आता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। अन्यथा, कलेक्टर ट्रैक्टर-ट्राली और जब्त चावल को शासन के हित में राजसात करने की कार्रवाई कर सकते हैं। खाद्य आपूर्ति अधिकारी प्राची शर्मा ने कहा कि नायब तहसीलदार द्वारा गुरुवार को एक ट्रैक्टर-ट्राली में 66 कट्टे चावल जब्त किए गए थे। कलेक्टर के निर्देश पर चावल को शासकीय वेयरहाउस मुंगावली में और ट्रैक्टर-ट्राली को बहादुरपुर थाने में रखा गया है। ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट नहीं लगी है और मालिक का पता लगाया जा रहा है। चावल के संबंध में किसी भी व्यक्ति ने अब तक संपर्क नहीं किया है। हम प्रतिवेदन बनाकर कलेक्टर को भेज रहे हैं।