इस बार प्याज ने किसानों की आंखों में पानी ला दिया है। मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में प्याज किसानों की मेहनत इस बार बेमौसम बारिश की भेंट चढ़ गई। बेमौसम बारिश ने फसल की ऐसी दुर्दशा की है कि अब प्याज न खेत में काम आ रही है, न मंडी में दाम पा रही है।
जिले के किसानों ने लाखों रुपये खर्च कर प्याज की फसल तैयार की थी, लेकिन आसमान से आई आफत ने सब कुछ तबाह कर दिया। खेतों में खड़ी फसल बारिश में सड़ गई और जो प्याज खेत से निकाली गई, वह इतनी खराब हो चुकी है कि स्टोरेज के लायक भी नहीं रही।
अब हालात ये हैं कि मंडियों में प्याज के दाम 1 से 5 रुपये प्रति किलो तक आ गए हैं। किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही है। ऊपर से मंडी तक प्याज पहुंचाने का खर्च और बढ़ती निराशा ने उन्हें पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है। प्याज व्यापारियों की भी परेशानी कम नहीं है। उनका कहना है कि खरीदी गई प्याज एक हफ्ते से ज्यादा टिक नहीं रही। प्याज में इतनी नमी है कि वह जल्दी ही सड़ने लगती है।
क्वालिटी इतनी खराब हो गई है कि कोई भी व्यापारी रिस्क लेने को तैयार नहीं है। अब किसान सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि प्याज पर समर्थन मूल्य तय किया जाए, तत्काल सरकारी खरीदी शुरू की जाए और फसल बीमा के तहत नुकसान का मुआवजा दिया जाए। किसानों की सारी उम्मीदें अब सरकार पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या उन्हें वक्त रहते राहत मिलेगी, या फिर एक बार फिर किसान की किस्मत प्याज के आंसुओं में ही बह जाएगी?