कुछ घंटों बाद रमजान के चांद का दीदार हो सकेगा। इसे लेकर ऐशबाग स्थित इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली की अगुवाई में चांद देखने की व्यवस्था की जा रही है। रमजान के महत्व पर अमर उजाला से बातचीत में मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि रोजा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम, धैर्य और इंसानियत का संदेश है। उन्होंने बताया कि रोजा रखते हुए जरूरतमंद की सहायता करना सबसे बड़ा पुण्य है। मौलाना ने स्पष्ट किया कि यदि किसी की जान बचाने के लिए रक्तदान करना पड़े तो रोजे की अवस्था में भी रक्तदान किया जा सकता है। इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति बीमार है और उसे उपचार के तहत सुई लगवाना आवश्यक है, तो वह भी लगवा सकता है। इस्लाम में जीवन की रक्षा को सर्वोपरि माना गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि चांद दिखाई देने की पुष्टि के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें और रमजान को इबादत, सेवा और भाईचारे के साथ मनाएं।