देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से लखनऊ पहुंचे कृष्ण लाल गुरनानी ने जीवन के सौ बसंत पूरे किए। आज हम आपका तार्रुफ जिस शख्सियत से कराने जा रहे हैं, उनकी आंखों में पूरी एक सदी ठहरी हुई है। या यूं कहें कि सौ साल की यादें आज भी उनकी आंखों में कैद हैं। इन यादों में देश के बंटवारे का दर्द है तो पाकिस्तान से पलायन की पीड़ा भी है। देश को साल दर साल उन्नति के पथ पर आगे बढ़ते हुए देखने की खुशी है तो चेहरे की झुर्रियों में अनगिनत किस्से और कहानियों का डेरा भी है। जी हां, हम बात कर रहे हैं लखनऊ की धरोहर केएल गुननानी जी की जिन्होंने अपने जीवन के सौ वसंत इस बार के वसंत में पूरे कर लिए हैं। वसंत पंचमी की पूर्व संध्या पर अमर उजाला की टीम आज उनके आवास पर मौजूद है। आइए जानते हैं उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी।