हाईकोर्ट के वकीलों ने अधिवक्ता अधिनियम 1961 में प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। जिला अदालत कांप्लेक्स के बाहर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के बैनर तले जमा वकीलों ने नारेबाजी भी की। वकीलों के अनुसार मसौदा संशोधन में सबसे आपत्तिजनक प्रावधान धारा 35 ए है। इसमें लिखा है कि अधिवक्ताओं का कोई भी संघ, संघ का कोई भी सदस्य, कोई भी अधिवक्ता व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से अदालतों के काम का बहिष्कार नहीं करेगा।एसोसिएशन के प्रधान निर्मल कोतवाल ने कहा कि इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वकीलों पर समाज की आवाज उठाने का दायित्व होता है, लेकिन ये कौन सा प्रस्ताव है कि वकील अपने ही हक की आवाज नहीं उठा पाएंगे। ये प्रस्ताव वकीलों के खिलाफ है। कम से कम प्रस्ताव तैयार करने से पहले वकीलों की राय लेनी चाहिए थी। सरकार वकीलों का नियंत्रण अपने पास रखना चाहती है। ये मामला वकीलों की सुरक्षा का है। किसी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे। इस मामले में वे देश की बार काउंसिल के साथ खड़े हैं। अभी हमने सिर्फ प्रदर्शन किया है। जरूरत पड़ने पर कामकाज भी ठप रखेंगे। भविष्य में बार काउंसिल का जो भी आदेश होगा। उसी के तहत अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाएंगे। कोतवाल ने ये भी मांग की है कि जम्मू कश्मीर में जल्द जल्द से बार काउंसिल चुनाव कराया जाए। क्योंकि जम्मू कश्मीर में बार काउंसिल न होने की वजह से वकीलों के हित की बात नहीं होती। न ही उन्हें उचित फंडिंग होती है।