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Women Reservation Law: लोकसभा में बहस के बाद आधी रात में लागू हो गया महिला आरक्षण कानून

Fri, 17 Apr 2026 09:38 AM IST
Sahil Suyal वीडियो डेस्क,अमर उजाला

भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। लंबे इंतजार और दशकों की बहस के बाद आखिरकार महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला कानून अब औपचारिक रूप से लागू हो चुका है। गुरुवार को केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक कदम को अधिसूचना के जरिए लागू करते हुए साफ कर दिया कि देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अब वापसी का कोई रास्ता नहीं है।

केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी कर दिया गया है। यह वही कानून है जिसे सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित किया गया था और जिसे लोकप्रिय रूप से “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के नाम से जाना जाता है। इस कानून को भारतीय लोकतंत्र में लैंगिक समानता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

हालांकि, इस फैसले के साथ ही कई सवाल भी उठ खड़े हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब संसद में अभी भी इससे जुड़े अन्य संशोधन विधेयकों पर चर्चा चल रही है, तो फिर इस कानून को इतनी जल्दी लागू करने की क्या जरूरत थी? अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम की धारा 1(2) के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह कानून के लागू होने की तारीख तय करे। इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को इसकी प्रभावी तिथि घोषित की।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कानून लागू होने के बावजूद इसका वास्तविक लाभ महिलाओं को तुरंत नहीं मिलने वाला है। दरअसल, इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया को 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि महिलाओं को आरक्षण का फायदा 2029 के आम चुनावों से पहले मिल पाना संभव नहीं है।

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