देश की राजनीति में सांसदों और विधायकों के पाला बदलने को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनता किसी जनप्रतिनिधि को उसकी पार्टी और विचारधारा के आधार पर चुनती है, इसलिए चुनाव जीतने के बाद दल बदलना मतदाताओं के भरोसे और जनादेश के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि अगर जनप्रतिनिधि मनमर्जी से पाला बदल सकते हैं, तो चुनाव कराने का औचित्य ही क्या रह जाता है। सिब्बल ने इसे नैतिक, कानूनी और संवैधानिक रूप से गलत ठहराते हुए मांग की है कि अब इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय अदालत के स्तर पर होना चाहिए।