कोलकाता के प्रतिष्ठित साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में विधि छात्रा के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने पूरे बंगाल को झकझोर दिया है। इस अमानवीय अपराध पर सख्त कार्रवाई की मांग के बीच, अब यह मामला सियासी अखाड़े में बदल गया है।
टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी तथा विधायक मदन मित्रा के बयानों ने न केवल विपक्ष को हमला करने का मौका दिया है, बल्कि खुद पार्टी में भी गंभीर अंदरूनी फूट सामने आ गई है। पार्टी की तेजतर्रार नेता महुआ मोइत्रा ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
26 जून को एक विधि छात्रा ने एफआईआर दर्ज कराई कि उसके साथ कॉलेज परिसर में ही उसके कुछ साथियों ने लगातार साढ़े तीन घंटे तक गैंगरेप किया।
मुख्य आरोपी मनोजित मिश्रा, जो कॉलेज का पूर्व छात्र है, और दो अन्य वर्तमान छात्र इस घटना में शामिल हैं।
छात्रा के मुताबिक, आरोपियों ने न केवल उसे प्रताड़ित किया, बल्कि वीडियो बनाकर धमकियां भी दीं कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसके बॉयफ्रेंड को जान से मार देंगे।
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा – “अगर दोस्त ही अपने दोस्त के साथ ऐसा करे तो क्या किया जा सकता है? क्या हर जगह पुलिस हो सकती है? महिलाओं को विकृत पुरुषों से खुद ही लड़ना होगा।” इस बयान के बाद भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने टीएमसी पर निशाना साधा और इसे “विक्टिम ब्लेमिंग” करार दिया।
महुआ मोइत्रा, जो पहले भी अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं, ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा – “भारत में महिलाओं के प्रति नफरत किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है। फर्क बस इतना है कि टीएमसी ऐसी घिनौनी टिप्पणियों की निंदा करती है।” महुआ ने अपने ही नेताओं पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कुछ नेता मामले से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के रुख से पूरी तरह असहमत हैं।
महुआ के विरोध का जवाब कल्याण बनर्जी ने बेहद व्यक्तिगत स्तर पर दिया। उन्होंने कहा: “महुआ मोइत्रा हनीमून से लौटकर मुझ पर हमले कर रही हैं। उन्होंने 40 साल की शादी तोड़कर 65 साल के आदमी से शादी की। क्या यह महिलाओं को ठेस नहीं है?”
गौरतलब है कि महुआ ने हाल ही में बीजद के पूर्व सांसद पिनाकी मिश्रा से विवाह किया है। कल्याण के इस बयान को कई महिला संगठनों ने भी स्त्रीविरोधी करार दिया है।
टीएमसी के वरिष्ठ विधायक मदन मित्रा ने भी विवादास्पद बयान देते हुए कहा: “अगर कोई आपको कॉलेज बंद होने के बाद पद का लालच देकर बुलाए, तो वहां जाना ही क्यों?” इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया। भाजपा नेता अमित मालवीय ने इसे “पीड़िता को ही दोषी ठहराने वाला बयान” बताया और कहा कि टीएमसी के नेता अपराधियों का बचाव कर रहे हैं।
टीएमसी ने तेजी से डैमेज कंट्रोल करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया: “कल्याण बनर्जी और मदन मित्रा द्वारा दिए गए बयान व्यक्तिगत हैं। पार्टी का इनसे कोई संबंध नहीं है। हम इनकी कड़ी निंदा करते हैं।” टीएमसी ने यह भी कहा कि पार्टी महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी मनोजित मिश्रा की राजनीतिक संबंधों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने कॉलेज परिसर की CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के बयान के आधार पर केस दर्ज किया है। कोलकाता पुलिस ने आश्वासन दिया है कि पीड़िता को हरसंभव सुरक्षा और न्याय दिलाया जाएगा।
जहां एक युवती न्याय की उम्मीद कर रही है, वहां राज्य के नेता आपसी बयानबाजी और चरित्र हनन में उलझे हुए हैं। महुआ बनाम कल्याण का यह मामला अब केवल विचारों का नहीं, बल्कि नैतिकता और संवेदनशीलता की परीक्षा बन गया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है – क्या राजनीतिक पार्टियां महिला सुरक्षा के मामले में गंभीर हैं या बस बयानबाजी तक सीमित हैं?