शहरी बैंकों के बाहर की लाइनें खूब देख लीं। अब जरा गांव के हालात जान लीजिए। अमर उजाला की टीम ने अलीगढ़ के एक गांव का दौरा किया तो पता चला, कि न शादीवाले परिवारों को ढाई लाख रुपये मिल रहे हैं, न किसानों को। ऊपर से कोऑपरेटिव बैंक में पैसा जमा करने की सजा अलग से भुगतनी पड़ रही है।