पद्मश्री से सम्मानित, मशहूर शायर और पूर्व राज्यसभा सदस्य बेकल उत्साही शनिवार को अपने मुरीदों को छोड़कर चले गए। बेकल साहब को ब्रेन हैमरेज हुआ था। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में जन्मे बेकल उत्साही 95 वर्ष के थे। बेकल साहब का असली नाम शफी खान था। हिंदी, उर्दू और अवधी के गीत और गजलों को गांव की मिट्टी से निकालकर शहरों की कंक्रीट तक पहुंचानेवाले बेकल अकेले ही नज्मों को पढ़ना पसंद करते थे। बेकल साहब की रुखसती की खबर ने साहित्यकारों को हिला कर रख दिया। कवि अशोक चक्रधर ने उन्हें अपना पिता, अपना अभिभावक बताया।