देश की सियासत को अगड़ों और पिछड़ों में पूरी तरह बांट देने का ये दाग चस्पा हुआ उस समय के प्रधानमंत्री वी पी सिंह के दामन पर, जिन्हें लेकर कभी नारा बना था, राजा नहीं फकीर है, देश की तकदीर है। और, इस राजा ने देश की तकदीर ऐसी बदली कि अब राष्ट्रपति जैसे पदों का चुनाव भी उनकी योग्यता की कसौटी पर नहीं जाति की पहचान पर लड़ा जाता है।