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Union Budget 2026 | Railway Budget 2026: रेलवे ने सीनियर सिटीजन को दिया झटका!

Sun, 01 Feb 2026 04:30 PM IST
आदर्श अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट 2026–27 पेश कर दिया, लेकिन इस बजट में एक तबका ऐसा भी है जिसकी उम्मीदें एक बार फिर अधूरी रह गईं देश के करोड़ों वरिष्ठ नागरिक। हर बजट से पहले बुजुर्गों को यही आस रहती है कि रेलवे में मिलने वाली रियायतें बहाल होंगी, लेकिन इस बार भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

कोरोना महामारी से पहले भारतीय रेलवे पुरुष वरिष्ठ नागरिकों को 40% और महिला वरिष्ठ नागरिकों को 50% किराये में छूट देता था। मार्च 2020 में कोविड के नाम पर यह रियायत बंद कर दी गई थी। तब कहा गया था कि हालात सामान्य होते ही सुविधा लौटेगी, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी बजट 2026 में इस पर कोई ऐलान नहीं हुआ।

रफ्तार के सपने, बुजुर्गों की चिंता

इस बजट में जहां सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान हुआ मुंबई से पुणे, दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी तक वहीं बुजुर्ग यात्रियों की मूल जरूरतों पर सरकार की चुप्पी साफ दिखी। जिन शहरों के बीच अब मिनटों में सफर की बात हो रही है, वहीं पेंशन पर निर्भर बुजुर्गों के लिए टिकट के बढ़ते दाम एक बड़ी चिंता बने हुए हैं।

रेलवे सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रियायत खत्म होने से रेलवे को हर साल हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस आय का कुछ हिस्सा समाज के उस वर्ग को राहत देने में नहीं लगाया जा सकता, जिसने दशकों तक देश की सेवा की?

‘विकसित भारत’ में बुजुर्ग कहां?

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बार-बार ‘विकसित भारत’ का जिक्र किया। बुनियादी ढांचे, हाई-स्पीड रेल और आधुनिक स्टेशनों की बात हुई। लेकिन वरिष्ठ नागरिक संगठनों का कहना है कि विकास का मतलब सिर्फ तेज ट्रेनें नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता भी होनी चाहिए।

ऑल इंडिया सीनियर सिटीजन फोरम के एक पदाधिकारी ने कहा,
“हम बुलेट ट्रेन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिन बुजुर्गों को इलाज, पारिवारिक जिम्मेदारियों और धार्मिक यात्राओं के लिए रेल पर निर्भर रहना पड़ता है, उनके लिए छूट बहाल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए थी।”

महंगाई और किराया: दोहरी मार

पिछले कुछ वर्षों में रेल किरायों में भले ही बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी न हुई हो, लेकिन रिजर्वेशन चार्ज, सुपरफास्ट चार्ज और सुविधाओं के नाम पर खर्च लगातार बढ़ा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दोहरी मार जैसी है एक तरफ सीमित आय, दूसरी तरफ बढ़ता सफर खर्च।

बजट 2026 में रेलवे को रिकॉर्ड 2.55 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का आवंटन मिला है। सुरक्षा, ‘कवच’ सिस्टम, अमृत भारत स्टेशन योजना और बुलेट ट्रेन पर हजारों करोड़ खर्च किए जाएंगे। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वरिष्ठ नागरिकों की रियायत बहाल करने के लिए वाकई बजट में जगह नहीं थी?

राजनीतिक वादे, बजट में खामोशी

हर चुनाव से पहले कई राजनीतिक दल वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराये में छूट बहाल करने का वादा करते रहे हैं। लेकिन जब बजट पेश करने का वक्त आता है, तो यह मुद्दा फाइलों में दबा रह जाता है। बजट 2026 में भी न तो वित्त मंत्री के भाषण में और न ही बजट दस्तावेजों में इस पर कोई संकेत मिला।

उम्मीद अभी बाकी?

रेल मंत्रालय का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों की रियायत पर “नीति स्तर पर विचार” चल रहा है। हालांकि बजट में जिक्र न होना इस बात का संकेत है कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकताओं में यह मुद्दा ऊपर नहीं है।

देश की रेल तस्वीर भले ही हाई-स्पीड कॉरिडोर से बदलने जा रही हो, लेकिन बुजुर्ग यात्रियों की उम्मीदें आज भी उसी प्लेटफॉर्म पर खड़ी हैं जहां से राहत की ट्रेन अब तक नहीं आई।

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