उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार दोपहर करीब 1:45 बजे बादल फटने की घटना ने तबाही मचा दी। खीरगंगा में आई बाढ़ ने पलभर में पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि इस आपदा में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग मलबे में दबे होने की आशंका है।
घटना के बाद धराली बाजार पूरी तरह तबाह हो चुका है, कई होटल, दुकानें और मकान बह गए हैं। लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला, पूरा इलाका चीख-पुकार और अफरातफरी में बदल गया।
बाढ़ का पानी घरों के अंदर घुस गया और कई जगहों पर मलबा जमा हो गया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए हर्षिल सेना कैंप से 150 जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और अब तक 20 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। सेना ने घायलों का इलाज अपने कैंप में शुरू कर दिया है।
वहीं, SDRF और NDRF की टीमें भी राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। SDRF IG अरुण मोहन जोशी ने बताया कि विशेष उपकरण और टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भेजी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि राहत कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। उन्होंने लगातार अधिकारियों से संपर्क में रहने की बात कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर कहा, “मैं उत्तरकाशी त्रासदी से दुखी हूं और राज्य सरकार राहत में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।”
गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि तीन ITBP और चार NDRF की टीमें तत्काल मौके के लिए रवाना की गई हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भारत सरकार से दो एमआई और एक चिनूक हेलिकॉप्टर की मांग की है ताकि राहत कार्य तेज़ किया जा सके।
इधर, उत्तरकाशी की बड़कोट तहसील के बनाल पट्टी क्षेत्र में भारी बारिश से करीब डेढ़ दर्जन बकरियां बह गईं। कुड गदेरे में उफान के कारण पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।
बारिश के कारण यमुनोत्री हाईवे पर स्यानाचट्टी के पास 25 मीटर सड़क धंस गई, जिससे आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। साथ ही गंगोत्री हाईवे पर भी डबराणी, नाग मंदिर और नेताला के पास मलबा आने से यातायात बाधित रहा।
मौसम विभाग ने 10 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी दी है, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में। एहतियात के तौर पर देहरादून, पौड़ी, टिहरी और हरिद्वार में स्कूलों को बंद कर दिया गया है।
फिलहाल उत्तरकाशी में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन पहाड़ों से लगातार गिर रहे बोल्डर और मलबा राहत कार्य में बाधा बन रहे हैं।