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Delhi Dehradun Expressway की खासियतें जान उड़ जाएंगे होश!

Tue, 14 Apr 2026 02:48 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

क्या हो अगर दिल्ली से देहरादून का सफर सिर्फ ढाई घंटे में पूरा हो जाए? क्या हो अगर रास्ते में न जाम हो, न रुकावट… और सफर बने एक शानदार अनुभव?
और क्या हो अगर ये हाईवे सिर्फ तेज ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित हो? दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के साथ अब ये सब हकीकत बनने जा रहा है… जहां रफ्तार, सुविधा और सस्टेनेबिलिटी एक साथ नजर आएंगी। आइए आपको बताते है 2.5 घंटे में दिल्ली से देहरादून पहुंचाने वाले एक्सप्रेसवे की खासियतें। 

दिल्ली से देहरादून का सफर अब सिर्फ दूरी का नहीं, बल्कि अनुभव का नाम बनने जा रहा है… क्योंकि अब रास्ता छोटा ही नहीं, बल्कि कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और खूबसूरत भी होगा। 213 किलोमीटर लंबा दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर तैयार है, जो यात्रा के मायने ही बदल देगा।

अब तक जहां इस सफर को पूरा करने में 6 से 6.5 घंटे का समय लगता था, वहीं इस नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यही दूरी महज ढाई घंटे में तय की जा सकेगी। यानी ट्रैफिक जाम, रुकावट और लंबी थकाऊ ड्राइव अब अतीत की बात हो जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन करेंगे और इसे देश को समर्पित करेंगे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य के विकास के लिए गेमचेंजर बताया है। उनका मानना है कि इससे पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।

यह एक्सप्रेसवे 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के रूप में बनाया गया है। इसका मतलब है कि वाहन सिर्फ निर्धारित इंटरचेंज से ही प्रवेश और निकास कर सकेंगे। इससे सड़क पर अनधिकृत एंट्री, लोकल ट्रैफिक और अचानक रुकावटों की समस्या खत्म हो जाएगी। नतीजतन, यात्रा ज्यादा सुरक्षित और स्मूथ होगी।

लेकिन इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ इसकी रफ्तार नहीं, बल्कि इसका पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होना भी है। इस कॉरिडोर में 12 किलोमीटर लंबा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड सेक्शन बनाया गया है, जिसे एशिया का सबसे लंबा माना जा रहा है। यह सेक्शन जंगल के ऊपर बनाया गया है ताकि नीचे से जंगली जानवर बिना किसी बाधा के गुजर सकें।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए इसमें 200 मीटर लंबे एलिफेंट पास और 8 खास एनिमल पास भी बनाए गए हैं। यह सुनिश्चित करता है कि हाथी और अन्य वन्यजीव अपने प्राकृतिक रास्तों पर सुरक्षित तरीके से आ-जा सकें और सड़क उनके लिए खतरा न बने।

इस एक्सप्रेसवे को ‘सस्टेनेबल बाय डिजाइन’ के सिद्धांत पर विकसित किया गया है। यानी निर्माण के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने, हरित क्षेत्र को सुरक्षित रखने और प्रकृति पर न्यूनतम प्रभाव डालने पर खास ध्यान दिया गया है। यह परियोजना आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का बेहतरीन उदाहरण पेश करती है।

सफर को और सुगम बनाने के लिए डाटकाली मंदिर के पास करीब 370 मीटर लंबी टनल भी बनाई गई है। यह टनल न सिर्फ यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ाती है, बल्कि धार्मिक और भौगोलिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की गई है।

इस एक्सप्रेसवे पर कुल 10 इंटरचेंज बनाए गए हैं, जो अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों को इससे जोड़ते हैं। इससे स्थानीय लोगों के लिए भी कनेक्टिविटी आसान होगी। इसके अलावा, 3 ओवर रेलवे ब्रिज और 4 बड़े पुल बनाए गए हैं, जिससे रेलवे लाइनों और नदियों के ऊपर से निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होती है।

लंबे सफर को आरामदायक बनाने के लिए 12 वेसाइड एमिनिटीज भी विकसित की गई हैं, जहां यात्री रुककर आराम कर सकते हैं, खाना खा सकते हैं और जरूरी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।

इतना ही नहीं, इस एक्सप्रेसवे पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाया गया है, जो ट्रैफिक की निगरानी करेगा और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने में मदद करेगा।

कुल मिलाकर, दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि भविष्य की ओर बढ़ता भारत है जहां रफ्तार भी है, सुरक्षा भी और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भी। अब सफर सिर्फ मंजिल तक पहुंचने का जरिया नहीं, बल्कि एक शानदार अनुभव बनने वाला है।

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