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Supreme Court ON CJP Protest:छात्रों के प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोले CJP प्रवक्ता

Tue, 04 Aug 2026 04:17 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नीट पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर और विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन करने वाले छात्रों से जुड़े मामलों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार और अन्य राज्य सरकारें ऐसे छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को बंद कर सकती हैं, वापस ले सकती हैं या कानून के अनुरूप क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती हैं, बशर्ते संबंधित छात्रों का कोई गंभीर या जघन्य आपराधिक इतिहास न हो। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि "आपराधिक पृष्ठभूमि" का अर्थ सामान्य विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों से नहीं, बल्कि हत्या, बलात्कार, डकैती, संगठित अपराध या अन्य गंभीर एवं जघन्य अपराधों से जुड़े रिकॉर्ड से है। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। यदि किसी पुलिस अधिकारी ने प्रदर्शन के दौरान आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है तो उसे केवल पद के आधार पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए, वहीं दूसरी ओर विरोध-प्रदर्शन की आड़ में किसी कुख्यात या गंभीर अपराधी को भी राहत नहीं दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को छात्र आंदोलनों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का संकेत है कि जिन छात्रों ने केवल अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया और जिनका कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ दर्ज मामलों पर सरकारें मानवीय और कानूनी दृष्टिकोण अपनाते हुए पुनर्विचार कर सकती हैं। 

इस फैसले के बाद छात्र संगठनों और आंदोलन से जुड़े लोगों ने राहत की भावना व्यक्त की है। इसी क्रम में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत करते हुए इसे देश के छात्रों और युवाओं की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली सहित सभी राज्य सरकारों के पास यह अधिकार है कि वे छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लें, उन्हें बंद करें या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करें। सौरव दास ने दावा किया कि अब सभी संबंधित एफआईआर बंद हो जाएंगी और इससे उन हजारों छात्रों को राहत मिलेगी, जो नीट पेपर लीक के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल कानूनी राहत नहीं, बल्कि युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की भी पुष्टि करता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि किसी भी प्रकार की हिंसा, गंभीर अपराध या कानून-व्यवस्था भंग करने वाले मामलों को सामान्य विरोध-प्रदर्शन की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा और ऐसे मामलों में कानून अपना काम करता रहेगा। इस प्रकार अदालत ने छात्रों के अधिकारों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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