नार्को टेस्ट से क्या वो सच सामने आ जाएगा जो हम सब से छुपा है। वो सच क्या मेघालय पुल्स जान चुकी है और वो सच चार्जशीट में सामने आएगा या फिर पुलिस कोर्ट से नार्को टेस्ट की इजाजत मांगेगी। ये तो ाने वाला वक्त बताएगा लेकिन क्यों नार्को टेस्ट की मांग परिवार कर रहा है। कैसे ये टेस्ट सच को सामने ले आता है...दरअसल अपराधियों से सच उगलवाने के लिए पुलिस व अन्य एजेंसियों को तमाम हथकंडे अपनाने पड़ते हैं, फिर चाहे बेहद कड़ी पूछताछ हो या फिर थर्ड डिग्री।
लेकिन कई बार उनका वास्ता कुछ ऐसे शातिर अपराधियों से भी पड़ जाता है जो तमाम कोशिशों के बाद भी सच बताने को तैयार नहीं होते। ऐसे में कई बार पुलिस अदालत से इजाजत लेकर अपराधी का नार्को टेस्ट कराती है ताकि केस को उसके अंजाम तक पहुंचाया जा सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये नार्को टेस्ट होता क्या है? आइए हम आपको बताते हैं पुलिस के इस 'ब्रह्मास्त्र' के बारे में जो बड़े-बड़े अपराधों की गुत्थी सुलझाने में बड़े काम आता है।नार्को परीक्षण या नार्को एनालिसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति को कुछ दवाएं दी जाती हैं, जो व्यक्ति को आंशिक रूप से अचेत अवस्था में ले जाती हैं। इस तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से उन लोगों से छिपी हुई जानकारी निकलवाने के लिए किया जाता है जो नियमित पूछताछ के दौरान सहयोग करने के इच्छुक नहीं होते।
जानकारों का मानना है कि जटिल मामलों को सुलझाने और महत्वपूर्ण सुरागों को उजागर करने के लिए नार्कोएनालिसिस टेस्ट किया जाता है।किसी भी आरोपी का Narco Test करने से पहले उसका Polygraph Test करना अनिवार्य होता है। इस Test को Lie Detector Test भी कहते हैं, जिसमें एक मशीन की मदद से ये देखा जाता है कि आरोपी सच बोल रहा है या झूठ। हम विस्तार से जानेंगे कि नार्को टेस्ट क्या है और इसे कैसे किया जाता हैं...नार्को टेस्ट में कौन-सी दवा का प्रयोग किया जाता हैं?नार्को टेस्ट के साइड इफेक्ट क्या होते हैं?