अवैध घुसपैठियों के मुद्दे पर एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा आमने- सामने हैं. और एक दूसरे पर जुबानी हमला बोल रहे हैं. दरअसल कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कहा, "यह बयान राजनीति से प्रेरित और चुनाव को लेकर है। जहां भी जिस राज्य में चुनाव होता है वहां भाजपा, अमित शाह घुसपैठियों का मुद्दा उठाते हैं। अभी हाल में बिहार में चुनाव हुए वहां भी अमित शाह घुसपैठियों का मुद्दा उठा रहे थे लेकिन SIR हुआ और एक भी घुसपैठिया नहीं निकला उसी तरह बंगाल, असम में भी वे जब तक चुनाव नहीं हो जाते घुसपैठिया खोजेंगे लेकिन दोनों राज्यों में उनके लिए कोई जगह नहीं है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध घुसपैठियों के मुद्दे पर अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने हाल के बयानों और संसद में हुई चर्चाओं के दौरान स्पष्ट किया है कि भारत कोई 'धर्मशाला' नहीं है जहाँ कोई भी बिना अनुमति के आकर बस जाए। शाह ने सरकार की नीति को "Detect, Delete and Deport" (पहचान करें, हटाएं और निर्वासित करें) के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अवैध घुसपैठ न केवल देश की जनसांख्यिकी (demography) को बदल रही है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर खतरा है। शाह ने बार-बार आरोप लगाया है कि विपक्षी दल अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए घुसपैठियों को संरक्षण देते हैं और उन्हें मतदाता सूची में शामिल करवाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी नागरिक को भारत के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
मार्च 2025 में संसद में पारित इमिग्रेशन बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि केवल वैध तरीके से आने वाले लोगों का ही स्वागत है, जबकि गलत मंशा से आने वाले घुसपैठियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में रैलियों के दौरान उन्होंने वादा किया है कि भाजपा सरकार चुन-चुनकर घुसपैठियों को बाहर निकालेगी। उन्होंने असम में एक लाख बीघा से अधिक जमीन को घुसपैठियों के कब्जे से मुक्त कराने का भी उल्लेख किया है।सरकार घुसपैठ रोकने के लिए सीमा पर बाड़ लगाने के काम को गति दे रही है और मतदाता सूचियों के 'शुद्धिकरण' (Special Intensive Revision) के माध्यम से अवैध नामों को हटाने की प्रक्रिया पर जोर दे रही है।