बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी द्वारा राजधानी पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड के सरकारी आवास को विधिवत खाली करने के बाद शुक्रवार को भवन निर्माण विभाग ने आवास की स्थिति का विस्तृत निरीक्षण कराया। विभाग के विभिन्न अभियंताओं की टीम ने आवास का जायजा लेकर यह सुनिश्चित किया कि भवन सरकार को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वापस सौंपा जा रहा है। निरीक्षण दल में सिविल इंजीनियरों के अलावा बिजली, उद्यान प्रमंडल तथा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के अधिकारी भी शामिल रहे। इन अधिकारियों ने भवन के प्रत्येक हिस्से का निरीक्षण करते हुए विद्युत व्यवस्था, पेयजल एवं पाइपलाइन प्रणाली, बगीचे की स्थिति, भवन की संरचना तथा अन्य सरकारी संपत्तियों का आकलन किया। निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आवास की वर्तमान स्थिति का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जा सके और भविष्य में किसी प्रकार की मरम्मत या रखरखाव की आवश्यकता होने पर उसके अनुसार कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस आवास से जुड़े संवेदक (कॉन्ट्रैक्टर) ने सरकारी आवास पर ताला लगा दिया। राबड़ी देवी के कॉन्ट्रैक्टर मुन्ना ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से सरकारी आवास को पूरी तरह खाली कर दिया गया है और उनके सभी निजी सामान को सुरक्षित रूप से वहां से हटा लिया गया है। उन्होंने कहा कि घर खाली करने की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी की गई है तथा अब भवन को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया है। मुन्ना ने यह भी स्पष्ट किया कि आवास में मौजूद सभी निजी सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिए गए हैं और सरकारी परिसर में अब कोई व्यक्तिगत सामग्री नहीं बची है। उन्होंने बताया कि आवास की चाबियां संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) को सौंपने की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है, जिससे भवन निर्माण विभाग औपचारिक रूप से इस आवास का कब्जा अपने हाथ में ले सके। उनके अनुसार सरकारी आवास खाली करने से लेकर निरीक्षण, ताला लगाने और चाबियां सौंपने तक की सभी औपचारिकताएं नियमानुसार पूरी कर ली गई हैं। विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण और चाबियों के हस्तांतरण के बाद अब यह आवास पूरी तरह भवन निर्माण विभाग के नियंत्रण में आ जाएगा। इसके बाद विभाग आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करते हुए भविष्य में इस सरकारी आवास के आवंटन अथवा रखरखाव से संबंधित निर्णय ले सकेगा। इस पूरी कार्रवाई को सरकार की निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत किसी भी सरकारी आवास को खाली कराने के बाद उसकी स्थिति का तकनीकी निरीक्षण, अभिलेखीकरण तथा औपचारिक रूप से विभाग को हस्तांतरण सुनिश्चित किया जाता है।